नयी दिल्ली , मई 4 -- अस्पतालों में आग से बचाव सुनिश्चित करने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 4 मई से 10 मई तक देशव्यापी 'अग्नि सुरक्षा सप्ताह' कार्यक्रम शुरू किया है और अग्नि सुरक्षा की प्रणालीगत व्यवस्था तथा प्रशिक्षण व सतर्कता पर बल दिया है।
'अग्नि सुरक्षा सप्ताह' के उद्घाटन समारोहों के अंतर्गत "स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि सुरक्षा" विषय पर आधारित एक देशव्यापी शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया जिसका नेतृत्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने अग्नि रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया प्रणालियों को सुदृढ़ करने की दिशा में स्वास्थ्य संस्थानों और हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
इस वर्ष के अग्नि सुरक्षा सप्ताह के विषय - "सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित अस्पताल और अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक समाज: अग्नि रोकथाम के लिए एकजुट" - को रेखांकित करते हुए श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे संस्थानों के भीतर सुरक्षा सुनिश्चित करना एक साझा और सामूहिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह अवसर अग्नि सुरक्षा सप्ताह मौजूदा बुनियादी ढांचे के पुनर्मूल्यांकन , ऑडिट, कमियों तथा विसंगतियों की पहचान करने और कमियों को दूर करने तथा प्रणाली को मजबूत करने के उपायों की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। 'स्वास्थ्य सचिव ने इस अवसर पर सभी राज्यों और स्वास्थ्य सुविधाओं से आग्रह किया कि वे समन्वित स्वस्थ्य सूचना मंच ( आईएचआईपी ) पोर्टल पर नियमित रूप से अग्नि सुरक्षा ऑडिट का विवरण अपलोड करें। ऐसी प्रथाएं अनुपालन को संस्थागत रूप देंगी और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए एक निरंतर अनुस्मारक के रूप में कार्य करेंगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इस बात पर भी संतोष व्यक्त किया कि 50,000 से अधिक प्रतिभागियों ने पहले ही आईगॉट अग्नि सुरक्षा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है, जिसमें कई सरकारी संस्थान भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य और प्रमुख कृष्ण एस. वत्सा ने स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि सुरक्षा के लिए एक सक्रिय और प्रणाली-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अस्पताल में अग्नि आपात स्थितियों पर प्रतिक्रिया देने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवर होने चाहिए, साथ ही स्पष्ट रूप से परिभाषित और अभ्यास की गई निकासी प्रक्रियाएं भी मौजूद होनी चाहिए।
अग्नि सेवा महानिदेशक सुनील कुमार झा ने इस बात को रेखांकित किया कि अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने और प्रभावी आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए तैयारी, समन्वय और निरंतर सतर्कता ही प्रमुख तत्व हैं।
चर्चा में इस बात को भी रेखांकित किया गया कि अस्पतालों में अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों-जैसे कि इंटेंसिव केयर यूनिट , नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट , पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट और ऑपरेशन थिएटर -के लिए अद्यतन प्रावधान शामिल किये गये हैं, जहाँ सुरक्षा संबंधी कड़े प्रोटोकॉल अनिवार्य किये गये हैं।
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