कोलकाता , सितंबर 09 -- असम सरकार पश्चिम बंगाल सरकार से संगीतकार, गीतकार और फिल्म निर्माता भारत रत्न डॉ. भूपेन हज़ारिका के टॉलीगंज वाले घर को खरीदकर उसे विरासत स्थल बनाना चाहती है जहां उन्होंने अपने रचनात्मक जीवन का एक बड़ा हिस्सा बिताया और कई सदाबहार गाने अपने प्रशंसकों तक पहुंचाये।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर टॉलीगंज में 77बी, गोल्फ क्लब रोड पर स्थित भारत रत्न हजारिका के घर को खरीदने और उसे विरासत स्थल के तौर पर विकसित करने में व्यक्तिगत दखल देने का अनुरोध किया है।

पत्र में श्री सरमा ने कहा कि हजारिका ने अपने रचनात्मक जीवन के "महत्वपूर्ण वर्षों" का एक बड़ा हिस्सा कोलकाता के इस पते पर बिताया और यहीं से कई "अमर और कालजयी रचनाओं" का सृजन किया।

उन्होंने कहा कि यह सम्पति असम के लोगों के लिए बहुत भावनात्मक महत्व रखती है और राज्य सरकार इसे खरीदकर विरासत स्थल के तौर पर सुरक्षित रखना चाहती है। मुख्यमंत्री सरमा ने श्री अधिकारी को लिखा, "मैं आपके सम्मानित कार्यालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि कृपया इस सम्पति को खरीदने में मदद करें और इसके लिए सभी ज़रूरी औपचारिकताएं हमारी तरफ से पूरी की जाएंगी।" श्री सरमा ने कोलकाता के साथ हजारिका के जुड़ाव के व्यापक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर भी ज़ोर दिया, खासकर असम और पश्चिम बंगाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों के संदर्भ में।

उन्होंने श्री अधिकारी से महान कलाकार की साल भर चलने वाली जन्म शताब्दी समारोहों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया पर पत्र की कुछ बातें साझा करते हुए कहा कि संगीतकार हजारिका के जीवन में कोलकाता का अहम स्थान था और गायक-संगीतकार ने टॉलीगंज वाले घर में रहते हुए कई सदाबहार गाने रचे थे।

उन्होंने कहा कि घर को सुरक्षित रखने से आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को बचाने में मदद मिलेगी। यह पहल ऐसे समय में की गई है जब देश संगीतकार हज़ारिका की जन्म शताब्दी मना रहा है। वे एक मशहूर गायक, संगीतकार, कवि, फिल्म निर्माता और राजनेता थे, जिनका योगदान संगीत के अलावा साहित्य, सिनेमा और सार्वजनिक जीवन में भी रहा।

असम सरकार ने कहा है कि वह प्रस्तावित खरीद के लिए सभी ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी करने को तैयार है। इस कदम का मकसद भारत रत्न हज़ारिका के जीवन के उस दौर से जुड़ी भौतिक कड़ी को भी बचाए रखना है, जो असम और कोलकाता के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता था।

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