नयी दिल्ली , जून 2 -- पूर्वोत्तर राज्यों के विशिष्ट उत्पादों के उत्पादन, व्यापार और निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए उन उत्पादों पर केंद्रित विशेष बहु-आयामी और समन्वित मिशन शुरू करने के क्रम में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास विभाग (डोनर मंत्रालय) के मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मंगलवार को यहां असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्व सरमा के साथ मिलकर "मिशन स्नेहजोरी - असम मूगा सिल्क यूएसपी" का शुभारंभ किया।
श्री सिंधिया ने बताया कि लगभग 396-411 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश वाले इस तीन वर्षीय मिशन में एमडीओएनईआर का योगदान 136-151 करोड़ रुपये होगा। इसका लक्ष्य वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त लक्ज़री मूगा रेशम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण, उत्पादकों की आय में वृद्धि तथा असम को रेशम-आधारित सांस्कृतिक एवं अनुभवात्मक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाना है।
श्री सिंधिया ने कहा कि मोदी सरकार उत्तर-पूर्व क्षेत्र की विशिष्टताओं और उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने तथा स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि असम का मूगा रेशम केवल एक वस्त्र उत्पाद नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत धरोहर है। यह मिशन उन्होंने बताया कि मिशन स्नेहजोरी को "समग्र सरकार" दृष्टिकोण के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, असम सरकार, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के साझेदारों का समन्वय शामिल है।
यह एक व्यापक क्लस्टर-आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य असम के विशिष्ट मूगा रेशम क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, उच्च-मूल्य वाले लक्ज़री वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित करना है। इसके अंतर्गत डोनर मंत्रालय नेतृत्व में, असम सरकार, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय तथा अन्य केंद्रीय मंत्रालयों/संगठनों के सहयोग से संचालित यह मिशन मूगा रेशम की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास करेगा। इसमें उन्नत शहतूत की खेती, रेशमकीट-बीज उत्पादन, रीलिंग, बुनाई, ब्रांडिंग, निर्यात प्रोत्साहन, डिजिटल ट्रेसबिलिटी तथा पर्यटन को शामिल किया गया है।
मूगा रेशम, जिसे दुनिया का एकमात्र प्राकृतिक सुनहरा रेशम माना जाता है और जो भारत का पहला जीआई-टैग प्राप्त रेशम है, असम में लगभग 2.6 लाख पालक एवं बुनकर परिवारों की आजीविका का आधार है। मिशन स्नेहजोरी का उद्देश्य एक प्रीमियम, ट्रेस करने योग्य और निर्यात-उन्मुख मूगा रेशम अर्थव्यवस्था का निर्माण करके इस मूल्य अंतर को समाप्त करना है। इस मिशन के लिए जाेरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची सहित प्रमुख मूगा रेशम उत्पादक जिलों में क्लस्टर-आधारित रणनीति अपनायी जाएगी।
डोनर मंत्रालय के मंत्री श्री सिंधिया ने कहा कि मिशन की सफलता तब मानी जाएगी जब असली असम मूगा रेशम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लक्ज़री बाजारों में प्रमुख स्थान प्राप्त करेगा तथा राज्य के बुनकरों और पालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने मूल्य श्रृंखला को अवसंरचना विकास, ब्रांडिंग, गुणवत्ता आश्वासन और निर्यात सुविधा के माध्यम से मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
विश्व के 90 प्रतिशत मूगा रेशम का उत्पादन असम में होता है और इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग, असाधारण टिकाऊपन तथा जीआई-आधारित प्रमाणिकता इसे वैश्विक लक्ज़री वस्त्रों में विशिष्ट बनाते हैं।उन्होंने कहा कि किसानों और उद्यमियों के अथक प्रयासों के बावजूद वर्तमान में उत्पादकों की वार्षिक आय केवल 18,000-21,000 रुपये है। मिशन स्नेहजोरी इस स्थिति को बदलने के लिए बनाया गया है ताकि मूगा रेशम का पूरा प्रीमियम मूल्य खेत से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचे और उसका लाभ असम के बुनकरों एवं पालकों को मिले। श्री सिंधिया ने कहा, "मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि हम मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक हिस्से को एक साथ जोड़ने में योगदान देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि असम के कोकून से निकलने वाला मूगा रेशम विश्व मंच तक पहुंचे।"मुख्यमंत्री श्री सरमा ने मिशन स्नेहजोरी की परिकल्पना और समर्थन के लिए एमडीओएनईआर की सराहना की तथा इसे असम के पारंपरिक रेशम क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि मूगा रेशम असम की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है और यह मिशन किसानों, पालकों, बुनकरों, कारीगरों तथा उद्यमियों के लिए नए अवसर प्रदान करेगा, साथ ही राज्य की समृद्ध विरासत को भी संरक्षित करेगा।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा कि भारत सरकार ने उत्तर-पूर्व क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी है। उन्होंने मिशन स्नेहजोरी को एक परिवर्तनकारी पहल बताया, जो असम को प्रीमियम रेशम उत्पादन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने, रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा सतत ग्रामीण आजीविका सुनिश्चित करने में सहायक होगी।
एमडीओएनईआर के सचिव संजय जाजू ने मिशन के कार्यान्वयन ढांचे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असम दुनिया में प्रामाणिक मूगा रेशम का एकमात्र उत्पादक है। मिशन के अंतर्ग रेशम कीट को आश्रय देने वाले शहतूत मेजबान पौधों के पुनर्जीवन, बीज सुरक्षा, आधुनिक रीलिंग अवसंरचना, जीआई प्रमाणीकरण, डिजिटल ट्रेसबिलिटी प्रणाली तथा ब्रांडिंग और निर्यात के माध्यम से बाजार पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित होगा।
मिशन का लक्ष्य वर्ष 2028 तक कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करना है, जिनमें पाँच आधुनिक मूगा रीलिंग इकाइयों और एक मूगा स्पन मिल की स्थापना, 30 एफपीओ और 1,180 से अधिक किसान हित समूहों का गठन, 5,000 हेक्टेयर सोम और सुआलु शहतूत के पौधों का पुनर्जीवन, 80 प्रतिशत से अधिक व्यापारिक मूगा रेशम का जीआई-आधारित प्रमाणीकरण, 8,000 से अधिक परिवारों के लिए डिजिटल ट्रेसबिलिटी व्यवस्था तथा वार्षिक मूगा रेशम निर्यात को 2,000 किलोग्राम से अधिक तक बढ़ाना शामिल है।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा के साथ , केंद्र और राज्य सरकार, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र एवं रेशम पालन संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि, बुनकर, उद्यमी तथा मूगा रेशम मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारक वर्चुअल रूप से जुड़े थे।
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