नयी दिल्ली , जुलाई 02 -- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने असम में सोनितपुर जिले के बोरजुली क्षेत्र को जंगली धान के लिए 'जैव विविधता धरोहर स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया है।
यह मान्यता भारत की समृद्ध जंगली धान जैव विविधता के संरक्षण तथा जलवायु-सहिष्णु कृषि को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए) ने ज़िले में 'जंगली धान (ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन) के संरक्षण और प्रबंधन' नाम की अपनी परियोजना के ज़रिए जंगली धान के जेनेटिक संसाधनों के संरक्षण में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) के वैज्ञानिकों के एक दल ने एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार से मुलाकात कर उन्हें जंगली धान के जर्मप्लाज्म की खोज, संरक्षण एवं विशेषताओं के अध्ययन के क्षेत्र में परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों से अवगत कराया। दल ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत चिन्हित असम के सोनितपुर जिले का बोरजुली क्षेत्र राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा 'जैव विविधता धरोहर स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया है।
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