नागपुर , जून 22 -- महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ को अवगत कराया है कि राज्य में अवैध रूप से संचालित पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं पर अंकुश लगाने के लिए नया नियामक ढांचा तैयार किया जा रहा है।

न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोड़े की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रस्तावित नियमों, उनके दायरे और क्रियान्वयन व्यवस्था से संबंधित विस्तृत हलफनामा अगले सप्ताह दाखिल करे। यह निर्देश यवतमाल के सामाजिक कार्यकर्ता दिगंबर पाजगड़े द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे लोग पैथोलॉजी लैब चला रहे हैं जिनके पास निर्धारित योग्यता नहीं है।

याचिका के अनुसार मौजूदा नियमों के तहत केवल एमबीबीएस या पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी अथवा बायोकैमिस्ट्री में स्नातकोत्तर योग्यता रखने वाले पंजीकृत प्रैक्टिशनर ही पैथोलॉजी लैब संचालित कर सकते हैं। इसके बावजूद कई लैब केवल मेडिकल लैब प्रौद्योगिकी डिप्लोमा (डीएमएलटी) या मेडिकल लैब प्रौद्योगिकी सर्टिफिकेट (सीएमएलटी) योग्यता रखने वाले लोग चला रहे हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि गलत जांच रिपोर्टों के कारण मरीजों के उपचार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिससे जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। सरकार ने न्यायालय को बताया कि लोक स्वास्थ्य विभाग अवैध पैथोलॉजी लैब के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए नये नियम तैयार कर रहा है।पिछली सुनवाइयों के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से अनधिकृत पैथोलॉजी लैबोरेटरी के खिलाफ की गयी कार्रवाई का विवरण मांगा था और अधिकारियों को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।

इसके जवाब में, सरकार ने न्यायालय को बताया कि स्वास्थ्य विभाग नियमों को मज़बूत करने तथा गैर-कानूनी रूप से चल रही पैथोलॉजी लैब के ख़िलाफ़ असरदार कार्रवाई को आसान बनाने के लिये नये नियम तैयार कर रहा है।

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