चंडीगढ़ , अप्रैल 23 -- पंजाब के जल संसाधन, मृदा एवं जल संरक्षण तथा खनन एवं भूविज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने गुरुवार को तीनों विभागों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर सख्त निर्देश जारी किये। इन निर्देशों का उद्देश्य अवैध खनन पर नियंत्रण, सिंचाई परियोजनाओं में तेजी और राज्य में बाढ़ से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना है।
खनन विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए श्री गोयल ने अधिकारियों को अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड गठित करने के निर्देश दिये। उन्होंने वाणिज्यिक खनन स्थलों के तहत अधिकतम साइटों को संचालित करने पर जोर दिया, ताकि पारदर्शिता बढ़े और कार्यप्रणाली सुव्यवस्थित हो सके। साथ ही, उन्होंने खनन क्षेत्र की रियल-टाइम निगरानी के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर सिस्टम अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
जल संसाधन विभाग की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि मानसून से पहले संभावित बाढ़ से बचाव के लिए सभी आवश्यक कार्य 30 जून तक हर हाल में पूरे किये जायें। उन्होंने नहरों के माध्यम से सिंचाई के दायरे को वर्तमान 78 प्रतिशत से आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।
मंत्री ने आगामी फसल सीजन को ध्यान में रखते हुए नहर जल उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिये। इसके साथ ही उन्होंने सभी प्रभावित जिलों में जलभराव वाली भूमि के सुधार कार्यों को तेज करने पर जोर दिया, ताकि कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सके और जल संसाधनों का सतत प्रबंधन सुनिश्चित हो। मृदा एवं जल संरक्षण विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अब तक 5,253 किलोमीटर लंबी सिंचाई पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिससे 1,61,000 एकड़ से अधिक कृषि भूमि को लाभ मिला है।
राज्य सरकार की प्रमुख पहलों पर प्रकाश डालते हुए श्री गोयल ने बताया कि तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रम शुरू किये गये हैं, गांवों के तालाबों के माध्यम से सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई ढांचा तैयार करना, कंडी क्षेत्र में चेकडैम का निर्माण (ताकि मिट्टी का कटाव रोका जा सके, अचानक आने वाली बाढ़ को नियंत्रित किया जा सकेऔर भूजल स्तर बढ़ाया जा सके) और फाजिल्का जिले के 29 गांवों में जलभराव भूमि सुधार की प्रमुख परियोजना।
उन्होंने बताया कि अब तक 250 से अधिक गांवों के तालाबों पर सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियां स्थापित की जा चुकी हैं, जिससे लगभग 10,500 एकड़ कृषि भूमि को लाभ मिला है। जलभराव भूमि सुधार परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है और मई के अंत तक चार गांवों में इसका कार्य पूरा होने की उम्मीद है।
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