, March 11 -- श्री शाह ने कहा कि भाजपा ने हमेशा लोकसभा अध्यक्ष पद की गरिमा का सम्मान किया है और इसी सम्मान का परिचय देते हुए कभी अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पेश नहीं किया। उनका कहना था कि अध्यक्ष का पद मध्यस्थता का होता है और उस पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं। उनका यह भी कहना था कि सदन को नियमों से ही चलाया जा सकता है और यदि नियमों की अनदेखी होगी और सदस्य अध्यक्ष के आदेश को नजरअंदाज करते तो अध्यक्ष का काम है कि वह सदस्यों को टोकें और जरूरत पड़े तो बाहर भी करें।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अध्यक्ष की गरिमा पर सवाल उठा रहे हैँ। उनका कहना था कि विपक्षी दल के सदस्य सरकार पर उपाध्यक्ष नहीं होने का आरोप लगा रहे हैं लेकिन पहले कांग्रेस ने अपने ही दल का उपाध्यक्ष रखने का काम किया है। यह काम नियमों के खिलाफ हुआ है। उनका कहना था कि श्री बिरला ने हमेशा सदस्यों के सम्मान का ध्यान रखा है और महिला सदस्यों के सम्मान का विशेष ध्यान रखा है। इसी का परिणाम है कि 2019 में रिकॉर्ड संख्या में 78 महिला सांसद चुनकर आई थीं और सबको सदन में बोलने का मौका दिया गया।
कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाते हैं लेकिन सच यह है कि 1975 में विपक्ष की आवाज दबाने का काम हुआ है और तब पूरे देश में विपक्ष के नेताओं की आवाज दबाई गई थी। इधर विपक्ष के नेता राहुल गांधी विदेश जाकर देश को बदनाम कर रहे हैं।
इससे पहले चर्चा में हिस्सा लेते हुए एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इसी सदन में ऐसे भी अध्यक्ष हुए हैं जिनके कार्यकाल में कभी सदस्यों को बहिर्गमन करने का मौका नहीं मिला। उन्होंने सोमनाथ चटर्जी जैसे अध्यक्षों का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने कहा था कि संसद में सुप्रीम कोर्ट का कोई नियम नहीं चलेगा। उनका कहना था कि अध्यक्ष सदस्यों के प्रति जवाबदेह होते हैं।
सपा के लालजी वर्मा ने कहा कि सरकार के मंत्री बार बार खड़े होते हैं और नियमों का उल्लंघन करते हैं। केरल कांग्रेस के के फ्रांसिस जार्ज ने कहा कि विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता है। चर्चा में आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर, निर्दलीय पप्पू यादव, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन, कांग्रेस के डॉ मल्लू रवि, भाजपा के तेजस्वी सूर्या ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
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