, March 11 -- तेलुगूदेशम के कृष्ण प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि कांग्रेस के व्यवहार के कारण बार-बार सदन की कार्यवाही बाधित होती है। व्यवधान के कारण जनता के धन की बर्बादी होती है। उन्होंने कहा कि श्री बिरला सभी को बोलने का अवसर देते हैं। वह नये सदस्यों को बार-बार बोलने का मौका देते हैं।

श्री तेन्नेटी ने कहा कि सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी विदेशों में जाकर देश की आलोचना करते हैं, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के विजय कुमार हंसदाक ने कहा कि अध्यक्ष की तरफ से सभी सदस्यों को सरंक्षण मिले, ऐसी अपेक्षा की जाती है। यहां विपक्ष को गैर जिम्मेदार बताया गया, विपक्षी सदस्य अपने लिए नहीं, जनता के हितों से जुड़े मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की ओर से जैसे व्यवहार की अपेक्षा है, वैसा नहीं होता है। अध्यक्ष सदन के संरक्षक होते हैं, वह सभी के लिए समान व्यवहार रखें, तो हमेशा उनको हमारा सहयोग मिलेगा।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( एमएल) (एल) के राजा राम सिंह ने कहा कि आरोप लगाया जाता है कि विपक्ष गैर जिम्मेदार व्यवहार करता है। विपक्ष जब इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध पर बात करना चाहे, तो उसे गैर जिम्मेदार ठहराया जाता है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस युद्ध पर सरकार की चुप्पी क्यों है।

राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि जब विपक्ष के सदस्य कुछ बोलने के लिए खड़े होते हैं, तो प्राय: आसन की ओर कहा जाता है, 'नो नो नो।' अब शायद ही कोई स्थगन या ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार किया जाता हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष दुश्मन नहीं होता, विपक्ष लोकतंत्र का पहरेदार होता है। उन्होंने कहा कि आखिर सदन में उपाध्यक्ष का पद खाली क्यों है?कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि सदन में विपक्ष को बोलने का मौका न देना, लोकतंत्र के वस्त्र हरण जैसा है। सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जाता। सत्ता पक्ष की ओर से बार-बार क्यों नेता विपक्ष को लक्षित किया जाता है। उन्होंने कहा कि एक बार उन्हें जब बोलने का मौका मिला और इसके लिए 10 मिनट दिये गये तो आसन पर श्री जगदम्बिका पाल थे और आठ मिनट श्री पाल ही बोलते रहे। उन्होंने कहा कि संसद सरकार की सम्पत्ति नहीं है, यह जनता के हितों के जुड़े मुद्दों को उठाने का मंच है।

समाजवादी पार्टी के सनातन पांडेय ने कहा कि क्षेत्र की जनता सड़क, रेल, सिंचाई सुविधाओं पर उनका प्रतिनिधि सदन में क्या कहता है, यह सुनना चाहती है। बाढ़, सूखा आदि आपदाओं पर जनता के प्रतिनिधि सदन में क्या आवाज उठा रहा है, यह जानना चाहती है। यहां विपक्षी सदस्यों की आवाज दबाने का प्रयास किया जाता है, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलता है।

भाजपा के भर्तहरि मेहताब ने कहा कि संसद राजनीति का मंच नहीं है। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला जाता है। यह सदन का अपमान है। उन्होंने कहा कि श्री बिरला ने संसद की कार्यवाही डिजिटल करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

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