जालौन , मार्च 16 -- बुंदेलखंड की जल सहेलियों द्वारा यमुना नदी को अविरल और निर्मल बनाने के संकल्प के साथ निकाली गई लगभग 500 किलोमीटर लंबी "अविरल-निर्मल यमुना यात्रा" का सफलतापूर्वक समापन हो गया।

सोमवार को भेंट वार्ता में जन-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने बताया कि यह पदयात्रा 29 जनवरी को जालौन जिले के प्रसिद्ध तीर्थ पंचनदा धाम से शुरू हुई थी और कई जिलों तथा सैकड़ों गांवों से गुजरते हुए अंततः दिल्ली के वासुदेव घाट पर जाकर समाप्त हुई।

यात्रा के दौरान बुंदेलखंड की जल सहेलियां गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचीं और लोगों को जल संरक्षण तथा नदी बचाने के लिए जागरूक किया। इस अभियान में लगभग 620 जल सहेलियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। पदयात्रा के दौरान जल सहेलियों ने 32 से अधिक विद्यालयों में पहुंचकर करीब 34,115 विद्यार्थियों से संवाद किया और उन्हें जल संरक्षण, नदी संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन के महत्व के बारे में बताया। इसके अलावा किसानों, युवाओं और ग्रामीणों सहित लगभग 61 हजार से अधिक लोगों से सीधे संवाद कर जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का संदेश दिया गया। कई स्थानों पर ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जल सहेलियों का स्वागत करते हुए यमुना कलश पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया।

यात्रा के दौरान यह भी सामने आया कि कई क्षेत्रों में यमुना का प्रवाह काफी कम हो गया है। चंबल नदी से मिलने से पहले कई स्थानों पर नदी में पानी की मात्रा बेहद कम हो जाती है। वहीं घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरे और अतिक्रमण के कारण नदी गंभीर रूप से प्रदूषित हो रही है। जल सहेलियों ने चेताया कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

पदयात्रा के दौरान कई स्थानों पर "यमुना चौपाल" और 15 से अधिक "यमुना संवाद" कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें नदी संरक्षण और जल प्रबंधन पर चर्चा हुई। समाज के विभिन्न वर्गों ने यात्रा को सहयोग दिया और कई विद्यालयों व महाविद्यालयों में जल सहेलियों के ठहरने की व्यवस्था की गई।

यात्रा के अनुभवों के आधार पर जल सहेलियों ने सुझाव दिया कि यमुना तटवर्ती क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन के लिए तालाब, चेक डैम और रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कराया जाए। साथ ही नदी में गिरने वाले नालों पर सीवेज शोधन संयंत्र स्थापित कर प्रदूषण को रोका जाए तथा तटवर्ती क्षेत्रों में वृक्षारोपण कर हरित पट्टी विकसित की जाए।

बताया गया कि लगभग 500 किलोमीटर लंबी इस यात्रा पर कुल 46 लाख 23 हजार 356 रुपये का खर्च आया, जिसे जल सहेलियों और समाज के सहयोग से एकत्र किया गया। संजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा केवल एक शुरुआत है और आगे भी जल स्रोतों के संरक्षण तथा यमुना को अविरल-निर्मल बनाने के लिए अभियान जारी रहेगा।

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