बगदाद , जुलाई 30 -- इराक के प्रभावशाली शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र ने अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त हवाई हमलों में 'पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़' (पीएमएफ) के लड़ाकों और इराकी सुरक्षा कर्मियों की मौत के लिए देश की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि वह हथियारों को अपने नियंत्रण में लाने में विफल रही। उन्होंने इसके लिए हथियारबंद समूहों की 'लापरवाही भरी हरकतों' को भी जिम्मेदार ठहराया है।

श्री अल-सद्र ने सोशल मीडिया एक्स पर मिलिशिया नेताओं पर अपने फ़ायदे को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया, जबकि उनके लड़ाकों को बढ़ते तनाव का खामियाज़ा भुगतना पड़ा। उन्होंने हथियारबंद समूहों की व्यक्तिगत और अतार्किक हरकतों को खत्म करने की मांग की।

उन्होंने कहा, "मिलिशिया की लापरवाही भरी हरकतें और हथियारों को केवल सरकार के नियंत्रण में रखने में नाकामी ही हमारे लड़ाकों की शहादत का कारण रही हैं और आगे भी रहेंगी।"उन्होंने कहा कि समूहों के नेता तो सुरक्षा, आराम और व्यापार का मज़ा लेते रहे, जबकि उनके लड़ाके मारे जा रहे थे। गौरतलब है कि श्री अल-सद्र के इराक़ के शिया मुस्लिम समुदाय में बहुत सारे समर्थक हैं और जिन्होंने अक्सर इराक़ के मामलों में ईरान के दखल की आलोचना की है। उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिनकी वजह से ये मौतें हुईं, उन्हें कोई सुकून नहीं मिल सकता और उन्होंने प्रार्थना की कि इराक़ को और नुकसान से बचाया जाए।

इस बीच, ईरान ने इराक़ पर अमेरिका और सऊदी अरब के हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि जिन जगहों को निशाना बनाया गया, उनमें से कुछ इराक़ी सरकारी संस्थान और वे केंद्र थे, जो 'शिया मुस्लिम समुदाय ' के धार्मिक आयोजन में शामिल होने वाले तीर्थयात्रियों के काम आती हैं।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि इन हमलों ने इराक़ की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया है और संयुक्त राष्ट्र चार्टर को तोड़ा है। ईरान ने इन हमलों को पूरे क्षेत्र में संघर्ष को बढ़ाने की अमेरिका और इज़रायल की कोशिश का हिस्सा बताया।

मंत्रालय ने कहा, "ये हमले इराक़ की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन करते हैं। " मंत्रालय ने इन्हें 'आपराधिक, अमानवीय और उकसावे वाली कार्रवाई' बताया। मंत्रालय ने हमलों में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और इराक़ी सरकार और जनता के साथ ईरान के पूरे समर्थन और एकजुटता की बात कही।

'अरबईन' दुनिया के सबसे बड़े सालाना धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें लाखों शिया मुसलमान इराक़ के शहर कर्बला में इकट्ठा होते हैं। यह आयोजन पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन के लिए 40 दिन के शोक की अवधि के समापन का प्रतीक है। आरोपों के इस नए दौर ने इराक़ में तनाव और बढ़ा दिया है, जहाँ हथियारबंद गुटों का प्रभाव और विदेशी ताक़तों की भूमिका राजनीतिक बहस के मुख्य विषय बने हुए हैं।

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