नयी दिल्ली , जून 12 -- भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में वर्तमान में बनी अल नीनो की स्थिति के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान और मजबूत होने की उम्मीद है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को कहा कि वायुमंडल समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान पर प्रतिक्रिया दे रहा है, और महासागर-वायुमंडल की यह संयुक्त प्रणाली अब अल नीनो की स्थिति के अनुकूल लक्षण प्रदर्शित कर रही है।

मौसम विभाग ने जून-सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान औसत से कम बारिश का अनुमान लगाया है। विभाग के अनुसार मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति के और मजबूत होने के संकेत हैं। अल नीनो एक प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाला जलवायु स्वरूप है। यह स्थिति तब बनती है, जब मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। वर्तमान में हिंद महासागर में हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) की समभाव( न्यूट्रल) स्थिति बनी हुई है। पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि जून-सितंबर सीजन के दौरान तटस्थ आईओडी की स्थिति बने रहने की संभावना है। आईओडी एक महासागर-वायुमंडल घटना है, जिसे पश्चिमी और इसे पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर के बीच समुद्र की सतह के तापमान के अंतर से परिभाषित किया जाता है। अनुकूल आईओडी को आमतौर पर मानसून के लिए अनुकूल माना जाता है, क्योंकि यह पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्र की सतह को अधिक गर्म करता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप की ओर नमी का प्रवाह बढ़ जाता है और यह अक्सर अल नीनो की स्थिति के शुष्क प्रभाव की भरपाई कर देता है।

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