इस्लामाबाद , फरवरी 26 -- इस्लामाबाद हाई कोर्ट अल-क़ादिर ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में सज़ा के निलंबन की मांग को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और बुशरा बीबी की याचिका की सुनवाई 11 मार्च को करेगा।

एक जवाबदेही अदालत ने 17 जनवरी 2025 को श्री खान और श्रीमती बीबी को 19 करोड़ पाउंड के भ्रष्टाचार के मामले में क्रमशः 14 और सात साल की सज़ा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि दोनों ने श्री खान के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ब्रिटेन से पाकिस्तान भेजे गये 50 अरब रुपए वैध बनाने के बदले अरबों रुपए और बहरिया टाउन में सैकड़ों कनाल ज़मीन रिश्वत के तौर पर ली थी। दोनों ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया है और इसी सिलसिले में इस्लामाबाद हाई कोर्ट का रुख़ किया।

चीफ़ जस्टिस सरदार मोहम्मद डोगर और जस्टिस मोहम्मद आज़म ख़ान की पीठ ने जब गुरुवार को सुनवाई की तो श्री खान के वकीलों को एक साथ मंचिका की ओर आते देख नाराज़गी ज़ाहिर की। अदालत ने सवाल किया कि क्या पूर्व प्रधानमंत्री अदालत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। इसके जवाब में श्री खान के वकीलों ने कहा कि ऐसी कोई कोशिश नहीं थी।

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि श्री खान की आंख में उठी परेशानी के चलते मामले ने काफी ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के बावजूद सुश्री बीबी सात साल की सज़ा काट रही थीं और सज़ा निलंबन की मांग करने वाली उनकी याचिका की सुनवाई छह माह के बाद निर्धारित की गयी थी।

उन्होंने कहा, "हम अदालत से अनुरोध करते हैं कि सज़ा निलंबित कर दी जाए। पिछला आदेश नौ नवंबर को पास हुआ था।"जस्टिस डोगर ने कहा कि जल्दी सुनवाई की मांग करने वाली ज़्यादातर अलग-अलग सिविल याचिकाएं बेकार हो गयी हैं, लेकिन उन्होंने निर्देश दिया कि निलंबन याचिका पर कार्यालय की आपत्तियों को खारिज कर दिया जाए।

चीफ़ जस्टिस ने रजिस्ट्रार कार्यालय को निर्देश दिया कि वे निलंबन याचिका और मुख्य आपराधिक याचिका दोनों को 11 मार्च के लिए अनुसूचित करें।

उल्लेखनीय है कि 20 दिसंबर, 2025 को, इस्लामाबाद की एक विशेष अदालत ने इस जोड़ी को तोशखाना मामले में कुल 17 साल की सज़ा सुनाई। यह मामला मई 2021 में एक आधिकारिक दौरे के दौरान सऊदी के युवराज द्वारा इमरान को उपहार में दिये गये बुलगारी ज्वेलरी सेट की खरीद से जुड़ा था। अभियोजन ने आरोप लगाया कि सेट काफी कम कीमत पर खरीदा गया था।

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