अल्मोड़ा/चम्पावत , मई 11 -- उत्तराखंड में प्रतिबंधित एवं नशीली दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अल्मोड़ा और चम्पावत जिला में सोमवार को मेडिकल प्रतिष्ठानों के खिलाफ सघन निरीक्षण अभियान चलाया। अभियान के दौरान कई मेडिकल स्टोरों में छापेमारी के दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर विभाग ने कार्रवाई शुरू की।
अल्मोड़ा में खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से औषधि निरीक्षक पूजा जोशी ने विभिन्न मेडिकल प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मेडिकल स्टोरों के ड्रग लाइसेंस की वैधता, दवाओं के स्टॉक तथा बिक्री और खरीद संबंधी अभिलेखों का सत्यापन किया गया। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति में तथा पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के वैध पर्चे के आधार पर ही की जाए।
निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों और उनकी रिकॉर्डिंग व्यवस्था की भी गहन जांच की गई। विभागीय जांच में तीन मेडिकल प्रतिष्ठानों में विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित संचालकों को सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। औषधि निरीक्षक पूजा जोशी ने कहा कि जिले में औषधि प्रतिष्ठानों की जांच आगे भी लगातार जारी रहेगी, ताकि दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता और निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
वहीं चम्पावत जिला में जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देश पर 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत औषधि विभाग ने सघन निरीक्षण अभियान चलाया। औषधि निरीक्षक हर्षिता ने बनबसा क्षेत्र के गढ़ीगोठ स्थित विभिन्न मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान चार मेडिकल प्रतिष्ठानों की जांच की गई, जिसमें ड्रग लाइसेंस की वैधता, औषधियों के स्टॉक, क्रय-विक्रय अभिलेख, कैश मेमो तथा सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता और रिकॉर्डिंग की समीक्षा की गई। जांच में एक मेडिकल स्टोर में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर उसके लाइसेंस के निलंबन की संस्तुति की गई। वहीं दो अन्य प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने तथा औषधियों के क्रय-विक्रय संबंधी अभिलेखों का सत्यापन नहीं कर पाने जैसी खामियां सामने आईं।
जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से इन तीनों मेडिकल स्टोरों की औषधि बिक्री पर रोक लगा दी है। संबंधित फर्मों को पांच दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए जाएंगे।
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