, Sept. 20 -- रामजल सेतु लिंक परियोजना से 4.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा के साथ 17 जिलों में पेयजल एवं परियोजना क्षेत्र में उद्योगों को जल उपलब्ध होगा। वहीं, लगभग 40 प्रतिशत आबादी की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकेगी। लगभग 92 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को वर्ष 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके तहत अब तक नवनेरा बैराज और ईसरदा बांध का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि लगभग 23312 करोड़ रुपये की लागत से सात कार्य प्रगति पर हैं। इनमें बारां में दो बैराज, बूंदी में चम्बल एक्वाडक्ट सहित विभिन्न जिलों में बैराज, पंप हाउस, फीडर तंत्र, पाइपलाइन तथा जल हस्तांतरण से जुड़े कार्य शामिल हैं। साथ ही, बीसलपुर पाइपलाइन के 19 हजार करोड़ के कार्य की डीपीआर फाइनल हो चुकी है। वहीं, ईसरदा बांध से दौसा और जयपुर के रामगढ़ बांध तक आने वाली पाइपलाइन के कार्यों को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।

यमुना जल परियोजना के क्रियान्वयन के लिए हरियाणा के साथ 29 जून 2026 को हुए एमओए के तहत धनावती कृत्रिम जलाशय के निर्माण के लिए एक हजार 622.31 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी हो चुकी है तथा निविदा प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रकार किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए 15 सितम्बर 2026 को राजस्थान सहित छह राज्यों के बीच समझौता हुआ। लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की लागत की इस परियोजना के तहत टौंस नदी पर प्रस्तावित एक हजार 324 एमसीएम जल भंडारण क्षमता में राजस्थान का आवंटन 134 एमसीएम है।

अन्य जल परियोजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है। लगभग सात हजार 355 करोड़ की लागत वाली परवन परियोजना के तहत कोटा, बारां और झालावाड़ जिलों के 571 गांवों में 2.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा तथा 1402 गांवों में पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। इसी प्रकार हाड़ौती क्षेत्र की विभिन्न मध्यम सिंचाई परियोजनाओं जैसे गागरिन, गरड़दा, हथियादेह, तकली एवं अंधेरी पर 315.40 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।

धौलपुर लिफ्ट परियोजना के माध्यम से 256 गांवों के लगभग 39 हजार 980 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा तथा धौलपुर एवं राजाखेड़ा तहसील के 190 गांवों के लिए पेयजल आरक्षित किया गया है तथा कालीतीर लिफ्ट परियोजना पर राज्य सरकार ने 266.70 करोड़ व्यय किए हैं।

मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र में पीपलखूंट हाई लेवल कैनाल परियोजना पर 1 हजार 487.49 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। इसके तहत माही बांध के जल से 24 गांवों में लगभग पांच हजार 127 हेक्टेयर कृषि भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाना प्रस्तावित है। वहीं, उदयपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद और चित्तौडगढ़ के दो हजार 453 गांवों में पेयजल उपलब्ध करवाया जाएगा। इसी प्रकार अपर हाई लेवल कैनाल माही परियोजना पर 986.90 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। इसके तहत बांसवाड़ा के 338 गांवों में लगभग 41 हजार 903 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। वहीं, देवास परियोजना से उदयपुर शहर को प्रतिवर्ष एक हजार एमसीएफटी पेयजल उपलब्ध करवाने का कार्य प्रगति पर है।

इंदिरा गांधी मुख्य नहर पर भी चार एस्केप जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है। जिनसे वर्षा के अतिरिक्त पानी को संग्रहित कर आवश्यकता के अनुसार पेयजल योजनाओं में उपयोग किया जा सकेगा। इन जलाशयों से बीकानेर, नागौर, जैसलमेर, जोधपुर और बाड़मेर जिलों में पेयजल उपलब्ध करवाया जा सकेगा।

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