अलवर , जून 13 -- पूर्व उपराष्ट्रपति एवं वरिष्ठ राजनेता जगदीप धनखड़ शनिवार को पत्नी के साथ एक दिवसीय निजी दौरे पर राजस्थान में अलवर पहुंचे।

अलवर में श्री धनखड़ ने जाट आरक्षण आंदोलन के अपने पुराने सहयोगियों और मित्रों से मुलाकात करके आंदोलन के दिनों की यादें ताजा की। सबसे पहले धनखड़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, सहकारिता आंदोलन के प्रमुख चेहरे एवं मुंडावर के पूर्व विधायक 94 वर्षीय महेंद्र शास्त्री के मोती डूंगरी स्थित निवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच लंबे समय तक विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर चर्चा हुई।

इसके बाद श्री धनखड़ अपने रिश्तेदार बहनोई धर्मपाल चौधरी से मिलने भी पहुंचे। अलवर सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने वर्तमान राजनीति से जुड़े सवालों पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया, लेकिन जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर विस्तार से अपने अनुभव साझा किये।

श्री धनखड़ ने कहा कि 1998-99 का जाट आरक्षण आंदोलन सामाजिक न्याय की एक बड़ी और ऐतिहासिक लड़ाई थी, जिसे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से लड़ा गया। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान कहीं भी किसी प्रकार की हिंसा, तोड़फोड़ या जान-माल की हानि नहीं हुई। आंदोलन का उद्देश्य केवल सामाजिक न्याय हासिल करना था और इसमें समाज के विभिन्न वर्गों का व्यापक समर्थन मिला।

उन्होंने बताया कि उस समय महेंद्र शास्त्री, डॉ. हरिसिंह, ज्ञान प्रकाश पिलानिया, राजाराम मील और स्वयं वह आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी।

श्री धनखड़ ने कहा कि जयपुर के विद्याधर नगर में आयोजित विशाल सभा में करीब 8 से 10 लाख लोगों की भागीदारी हुई थी। यह सामाजिक न्याय के लिए आयोजित देश के सबसे बड़े और शांतिपूर्ण आंदोलनों में से एक था। उन्होंने कहा कि उस समय समाज के विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया और समाज ने एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाया।

उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर 1999 को केंद्र सरकार ने राजस्थान के जाटों को (भरतपुर और धौलपुर को छोड़कर) केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में शामिल किया था। बाद में भरतपुर और धौलपुर के जाटों को आरक्षण से बाहर रखने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई।

पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक न्याय का मुद्दा हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि वर्ष 1989-90 में जब वे मंत्रिमंडल का हिस्सा थे, तब मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाये गये थे। तेरह सितंबर 1990 को अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का लाभ देने के लिए आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया।

श्री धनखड़ ने कहा कि आरक्षण मिलने के बाद पिछले 26 वर्षों में किसान और पिछड़े वर्ग के समाज में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। शासन-प्रशासन में वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ी है और सामाजिक जागरूकता का स्तर भी काफी ऊंचा हुआ है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की इस लड़ाई ने समाज के कई वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है।

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