अलवर , अगस्त 13 -- राजस्थान में जयपुर में स्वायत्त शासन विभाग की ओर से नगर निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली गयी।
इसमें अलवर नगर निगम के महापौर का पद अनारक्षित महिला के लिए तय हुआ है। आरक्षण की घोषणा के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस में संभावित महिला उम्मीदवारों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गयी है।
अनारक्षित महिला की सीट आने के बाद उन महिला नेताओं की दावेदारी भी मजबूत हो गयी है, जो अब तक चुनाव लड़ने को लेकर असमंजस में थीं। दोनों प्रमुख दलों में अंदरखाने संभावित नामों और राजनीतिक समीकरणों पर मंथन शुरू हो गया है।
अलवर नगर परिषद के पिछले करीब 26 वर्षों के इतिहास में दो बार ओबीसी महिला सभापति बनी हैं, जबकि तीन बार सामान्य और सामान्य महिला वर्ग से सभापति चुनी गईं। पिछले कार्यकाल के बीच अलवर नगर परिषद को नगर निगम में बदल दिया गया था। इसके कारण तत्कालीन कार्यकारी सभापति को ही महापौर की जिम्मेदारी दी गयी।
पिछली बार सामान्य महिला वर्ग के लिए पद आरक्षित था। हालांकि तत्कालीन सभापति को रिश्वत मामले में बर्खास्त किए जाने के बाद उपसभापति को सभापति बनाया गया और बाद में उन्हें ही महापौर का जिम्मा सौंपा गया। फिलहाल करीब दो वर्ष से नगर निगम में कलेक्टर प्रशासक के रूपमें कार्य कर रही हैं।
इस अवसर पर अलवर जिले की नगर निकायों के लिए भी आरक्षण की लॉटरी निकाली गयी है। बड़ौदामेव, कठूमर और रामगढ़ में सभापति का पद एससी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। नौगांवा में ओबीसी महिला, जबकि राजगढ़ और बहादरपुर में ओबीसी ओपन सीट रहेगी। भिवाड़ी नगर परिषद में भी सभापति का पद ओबीसी ओपन के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं मालाखेड़ा नगर पालिका एसटी ओपन के लिए आरक्षित हुई है।
जिले में अलवर नगर निगम के अलावा कठूमर, खेड़ली, गोविंदगढ़, थानागाजी, नौगांवा, बड़ौदामेव, बहादरपुर, मालाखेड़ा, राजगढ़ और रामगढ़ सहित नगर निकाय हैं। हाल ही में लक्ष्मणगढ़ को भी नगर पालिका बनाया गया है।
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