अलवर , अक्टूबर 06 -- राजस्थान में अलवर की पहचान से जुड़े प्रसिद्ध कलाकंद (मिल्क केक) को अब देश की सीमाओं से बाहर पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गयी है।
सरस डेयरी अलवर के अध्यक्ष नितिन सांगवान ने मंगलवार को बताया कि कलाकंद की पहुंच दिल्ली-एनसीआर और देश के बड़े शहरों तक बढ़ाने के साथ ही इसे कुवैत, दुबई, अजरबैजान और सऊदी अरब जैसे देशों में निर्यात करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
श्री सांगवान आज अपने एक वर्ष के कार्यकाल पूरा होने पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कलाकंद की सबसे बड़ी चुनौती उसकी सीमित उपयोग अवधि है। इसे ध्यान में रखते हुए नयी तकनीक वाली मशीन के माध्यम से इसकी उपयोग अवधि बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता और स्वाद को लंबे समय तक बनाये रखने में मदद मिलेगी और दूर-दराज के बाजारों तक इसकी आपूर्ति आसान हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि सरस डेयरी कलाकंद की ऑनलाइन उपलब्धता बढ़ाने के लिए ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे ऑनलाइन वाणिज्य कम्पनियों से साझेदारी की दिशा में बातचीत कर रही है। इससे दिल्ली-एनसीआर सहित अन्य बड़े शहरों में ग्राहक सरस के कलाकंद को आसानी से हासिल कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि डेयरी का मुख्य ध्यान पारंपरिक स्वाद को आधुनिक माल वितरण नेटवर्क से जोड़ने पर है।
श्री सांगवान ने बताया कि सरस के कलाकंद को पहले भी दो देशों में भेजने के लिए गुणवत्ता परीक्षण में सफलता मिल चुकी है। अब उस निर्यात माध्यम को दोबारा सक्रिय करने की तैयारी है। इसके जरिए अलवर के कलाकंद को खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि अलवर की पहचान देश और विदेश में लगातार मजबूत हो रही है। इसी पहचान को आगे बढ़ाते हुए अलवर के प्रसिद्ध कलाकंद को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। निर्यात की योजना सफल होती है तो अलवर की पारंपरिक मिठाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नया मंच मिलेगा।
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