नई दिल्ली , जुलाई 21 -- आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अर्बन चैलेंज फंड के दिशा-निर्देश अंतिम रूप दिए जाने के महज 20 से 25 दिनों के भीतर 31,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। यह जानकारी मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव डी. थारा ने उद्योगमंडल फिक्की के नौवें अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इनोवेशन समिट के दौरान यहां मंगलवार को दी।
सुश्री थारा ने बताया कि अब तक स्वीकृत परियोजनाओं के वित्तपोषण में 44 प्रतिशत हिस्सा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का है, जबकि 22 प्रतिशत निवेश सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीवी) के माध्यम से आ रहा है। इसके अलावा 5 से 7 प्रतिशत धनराशि बॉन्ड्स के जरिए जुटाई जा रही है, जबकि शेष वित्तपोषण वाणिज्यिक बैंकों द्वारा किया जा रहा है।
इस अवसर पर हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हडको) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय कुलश्रेष्ठ ने कहा कि भारत के शहर देश की केवल 3 प्रतिशत भूमि पर बसे होने के बावजूद 60 से 70 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड सब्सिडी-आधारित योजनाओं से हटकर चुनौती-आधारित मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।
इस योजना के तहत वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक वहन कर सकती है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारें समान रूप से योगदान देंगी, जबकि शेष राशि ऋणदाताओं और निजी निवेशकों (प्राइवेट इक्विटी) से जुटाई जाएगी।
चर्चा में आईआईटी दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस जगन शाह ने कहा कि शहरी विकास की नई कल्पना और नवाचार का नेतृत्व सरकार के बजाय निजी क्षेत्र को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के दूसरे और तीसरे स्तर (टियर-2 और टियर-3) के शहरों में स्थानीय स्तर पर क्षमता की कमी है, जिसे निजी क्षेत्र की भागीदारी से दूर किया जा सकता है।
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