कोलकाता , जून 16 -- पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास मेसी कार्यक्रम से जुड़े विवाद में समन मिलने के बावजूद मंगलवार को दोपहर तक जांचकर्ताओं के सामने पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, अगर वह आज की समय-सीमा तक पुलिस को जवाब नहीं देते हैं, तो मामला अदालत तक जा सकता है और अधिकारी सख़्त कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं।
खबरों के अनुसार, पुलिस ने श्री बिस्वास को निर्देश दिया था कि भेजे गये ताज़ा नोटिस के 48 घंटे के अंदर वह पुलिस स्टेशन में पेश हों। सूत्रों से पता चला है कि पूर्व मंत्री ने 19 जून को पुलिस के सामने पेश होने का संकेत दिया है।
बार-बार समन से बचने के कारण पुलिस आगे की कार्रवाई के लिए अदालत जाने पर विचार कर रही है। आदेश का पालन करने की आखिरी समय-सीमा आज दोपहर तय की गयी है और जवाब न देने पर पूर्व मंत्री की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
आठ जून को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने श्री बिस्वास को सशर्त कानूनी सुरक्षा प्रदान की थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि 17 अगस्त तक पूर्व मंत्री के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कई सख्त शर्तें भी लगाईं। अदालत ने बिस्वास को तुरंत अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी को सौंपने का आदेश दिया।
उन्हें अदालत की मंज़ूरी के बिना अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से भी रोक दिया गया, जिससे उनकी आवाजाही कानूनी निगरानी के दायरे में आ गयी। इस मामले में अगली सुनवाई चार अगस्त को तय की गयी है।
उच्च न्यायालय ने श्री बिस्वास को यह भी निर्देश दिया कि वह अंतरिम अवधि के दौरान जांच में पूरा सहयोग करें। बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वह पूछताछ के लिए बुलाने से पहले कम से कम 48 घंटे का नोटिस जारी करें, और श्री बिस्वास से कहा गया कि नोटिस मिलने पर वह पूरा सहयोग करें। बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन की पुलिस ने हाल ही में पूर्व मंत्री को ऐसा ही एक नोटिस जारी किया था।
जांच अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि वह मेसी विवाद की जांच की प्रगति और बिस्वास के खिलाफ कोई अतिरिक्त मामला दर्ज किया गया है या नहीं, इस बारे में अदालत को विस्तृत रिपोर्ट सौंपें।
यह विवाद युवा भारती क्रीड़ांगन में फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी से जुड़े एक कार्यक्रम में भारी कुप्रबंधन एवं वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से उत्पन्न हुआ है। कार्यक्रम के आयोजक शताद्रु दत्ता ने बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी।
अपने भाई स्वरूप बिस्वास की एक अलग मामले में पहले ही गिरफ़्तारी होने के बाद, श्री अरूप बिस्वास ने इस मामले में गिरफ़्तारी से सुरक्षा पाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया।
पूर्व मंत्री को 17 अगस्त तक गिरफ्तारी से अस्थायी राहत मिल गयी है लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत की ओर से लगाई गई कई शर्तों ने चल रही जांच में उनकी स्थिति को काफी सीमित कर दिया है।
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