ईटानगर , जून 05 -- अरुणाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को एक बड़ा बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के बागवानी विभाग ने वैज्ञानिक सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सतत बागवानी विकास को बढ़ावा देने के लिए हिमालय जैव संसाधन प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं।
इस समझौता ज्ञापन पर गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश के बागवानी निदेशक तोबोम बाम और सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने बागवानी मंत्री गेब्रियल डी. वांगसू, सचिव (बागवानी) कोज रिन्या, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और संस्थान के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए और दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया।
सभा को संबोधित करते हुए सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक ने संस्थान और अरुणाचल प्रदेश के बीच सहयोग की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला और राज्य की बागवानी उन्नति के लिए निरंतर वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता का आश्वासन दिया।
मंत्री वांगसू ने जोर देकर कहा कि यह साझेदारी केवल एक प्रतीकात्मक समझौता बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके व्यावहारिक और ठोस परिणाम दिखने चाहिए। उन्होंने प्रभावी कार्यान्वयन और मापने योग्य परिणाम सुनिश्चित करने के लिए निश्चित समय-सीमा के साथ एक स्पष्ट कार्य योजना बनाने का आह्वान किया।
श्री वांगसू ने कहा, "यह सिर्फ एक एमओयू नहीं है। इसे राज्य के लिए सार्थक लाभों में बदला जाना चाहिए। कार्य योजना के साथ-साथ समय-सीमा तय की जानी चाहिए और हर कदम को पेशेवर तरीके से उठाया जाना चाहिए।" मंत्री ने नोट किया कि अरुणाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश के साथ कई कृषि-जलवायु समानताएं साझा करता है, जिससे सीएसआईआर-आईएचबीटी की विशेषज्ञता यहाँ के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाती है। उन्होंने दोनों पक्षों से फूलों की खेती से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाले फलों और सब्जियों, औषधीय एवं सुगंधित पौधों और अन्य जैव-संसाधन क्षेत्रों को शामिल करने के लिए सहयोग का दायरा बढ़ाने का आग्रह किया।
जैव-संसाधन क्षेत्र की विशाल क्षमता का उल्लेख करते हुए श्री वांगसू ने कहा कि यह सहयोग राज्य और राष्ट्रीय विकास दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने इस साझेदारी के सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और विभागीय अधिकारियों को संस्थान को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।
बागवानी सचिव कोज रिन्या ने उम्मीद जताई कि यह सहयोग इस क्षेत्र में विज्ञान आधारित विकास के लिए एक मॉडल के रूप में उभरेगा। उन्होंने इस साल की शुरुआत में सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन में आयोजित सफल उन्नत फ्लोरीकल्चर प्रशिक्षण कार्यक्रम को याद किया, जिसने इस वर्तमान समझौते की नींव रखी थी।
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