ईटानगर , दिसंबर 09 -- अरुणाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय राजधानी में अंतर-सरकारी समिति (आईसीएच 20सीओएम) के चल रहे 20वें सत्र में 'लिपि और पांडुलिपि संरक्षण' पर विशेष कार्यशाला में अपनी अद्वितीय पांडुलिपि विरासत को प्रदर्शित किया।
अरुणाचल प्रदेश की कला और संस्कृति सचिव ममता रिबा, लेफ्टिनेंट कर्नल टीसी तायुम, कला और संस्कृति विभाग के सहायक निदेशक मान्यु इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने की।सुश्री रिबा ने नामसाई की लिक-थाई पांडुलिपियों, बौद्ध कांग्यूर धर्मग्रंथ और अन्य दुर्लभ बौद्ध तथा स्वदेशी ग्रंथों का उल्लेख करते हुए अरुणाचल प्रदेश की अद्वितीय एवं प्राचीन पांडुलिपि विरासत पर प्रकाश डाला।
सुश्री रिबा ने ज्ञान भारतम मिशन के तहत केंद्र सरकार को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए वैज्ञानिक संरक्षण, व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण और आधुनिक अभिलेखीय सुविधाओं के माध्यम से सहायता करने की अपील की।
लेफ्टिनेंट कर्नल टीसी तायुम ने अपनी प्रस्तुति में तवांग, पश्चिम कामेंग, शी-योमी, अपर सियांग और नामसाई जिलों में किए गए व्यापक दस्तावेज़ीकरण को प्रदर्शित किया। प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तुतियों में दुर्लभ पांडुलिपियों और पारंपरिक लिपियों की खोज शामिल थी, जिनमें महाभारत और रामायण के प्रसंगों वाले ग्रंथ भी थे। ये पांडुलिपियां क्षेत्र के समुदायों के बीच गहरे ऐतिहासिक और साहित्यिक संबंधों की ओर इशारा करते हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने पांडुलिपियों के संरक्षण में आने वाली चुनौतियों, जैसे पांडुलिपियों का पुरातन होना, कठिन जलवायु परिस्थितियों और अभिलेखीय कार्यों के लिए बुनियादी ढांचों के अभाव को उजागर किया। प्रतिनिधिमंडल ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए संरक्षण, डिजिटलीकरण और क्षमता-निर्माण के लिए एक व्यापक रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया।
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