ईटानगर , मार्च 01 -- अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने अपने अध्यक्ष बोसीराम सीरम के नेतृत्व में न्गोरलुंग-राुलुंग गांव की माताओं के आयोजित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल से उत्पन्न चिंताओं की जांच के लिए आठ सदस्यीय तथ्य-अन्वेषण समिति का गठन किया है।
महिला प्रदर्शनकारी ईस्ट सियांग जिले के निगलोक स्थित औद्योगिक विकास केंद्र में एथर अलॉयज एलएलपी संचालित खतरनाक फेरो सिलिकॉन कारखाना स्थायी रूप से बंद करने या तत्काल स्थानांतरित करने की मांग कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने पहले आश्वासन दिया था कि कारखाना स्थानांतरित कर दिया जायेगा, लेकिन यह अब तक पूरी नहीं हुई है।
एपीसीसी की उपाध्यक्ष याने दाई की अध्यक्षता वाली इस तथ्य-अन्वेषण समिति ने विरोध स्थल का दौरा किया और प्रदर्शनकारी माताओं से बातचीत की। समिति ने स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए फेरो सिलिकॉन इकाई का ऑन-साइट निरीक्षण भी किया। इस समिति में अधिवक्ता तामी पांगु उपाध्यक्ष और अधिवक्ता डेनियल गाओ सदस्य सचिव के रूप में शामिल हैं।
बिगड़ते स्वास्थ्य के बावजूद अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठी कई महिलाओं ने गंभीर चिंताएं जतायीं। इनमें श्वसन स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले जहरीले धुएं और धूल के कणों का निरंतर उत्सर्जन, ग्रामीणों में अस्थमा, पुरानी खांसी, आंखों में जलन और त्वचा रोगों के बढ़ते मामले, कृषि क्षेत्रों का प्रदूषण, जिससे फसलों को नुकसान और उत्पादकता में कमी आयी है, पीने के पानी और पशुधन को प्रभावित करने वाले जल स्रोतों का दूषित होना, स्थानीय पारिस्थितिकी को खतरे में डालने वाला ध्वनि प्रदूषण और औद्योगिक कचरे का अनुचित निपटान तथा कैंसर और अन्य जानलेवा बीमारियों सहित दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों का डर शामिल है।
एपीसीसी ने संज्ञान लिया कि फेरो सिलिकॉन निर्माण को एक उच्च जोखिम वाली औद्योगिक गतिविधि माना जाता है, जिसमें उच्च तापमान वाली इलेक्ट्रिक आर्क भट्टियां शामिल होती हैं, जो सिलिका धूल और खतरनाक धुआं पैदा करती हैं। इस प्रक्रिया से सूक्ष्म कण (पीएम2.5 और पीएम10), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर यौगिक और अन्य जहरीले उत्सर्जन निकल सकते हैं, साथ ही औद्योगिक कचरा (स्लैग) भी निकलता है, जो उचित प्रबंधन न होने पर मिट्टी और भूजल को दूषित कर सकता है।
न्गोरलुंग-राुलुंग गांव की माताओं के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए एपीसीसी ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय सुरक्षा को औद्योगिक लाभ से ऊपर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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