ईटानगर , अगस्त 29 -- अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसीराम सिरम ने केंद्र सरकार से पूर्वोत्तर राज्य के ताकसिंग और अन्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में एक संयुक्त सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाने की मांग की है।

चार दिवसीय दौरे से लौटे श्री सिरम ने कहा कि यह टीम जमीनी स्थिति का जायजा ले और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों एवं स्थानीय समुदायों से सीधा संवाद करे। उन्होंने सीमावर्ती निवासियों की चिंताओं और क्षेत्र में मौजूदा हालात का जायजा लेने के लिए 26 से 29 अगस्त तक ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र का चार दिवसीय दौरा करने के बाद यह मांग की है। उनके साथ एपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व गृह मंत्री तांगा बयालिंग, महासचिव एवं ऊपरी सुबनसिरी जिला प्रभारी जोरो डोका, और महासचिव तापी न्गुकी व रेरी किर्बे दुलोम के अलावा कांग्रेस कार्यकर्ता, पंचायत नेता और स्थानीय निवासी भी मौजूद थे।

दौरे में कांग्रेस टीम राष्ट्रीय ध्वज लेकर सीमा की ओर बढ़ी और सेना के जवानों से बातचीत की। जवानों ने उन्हें ताकसिंग-माजा-लाइमकिंग और सिरा क्षेत्रों की स्थिति के बारे में जानकारी दी।

श्री सिरम ने स्थानीय निवासियों से भी मुलाकात की और सुरक्षा, सड़क संपर्क, संचार, बुनियादी ढांचे, आजीविका और आवश्यक सेवाओं से जुड़ी उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने ताकसिंग-लाइमकिंग क्षेत्र में 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले हवलदार शेरे थापा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, "जो लोग सीमा की बात करते हैं, उनमें सीमा तक पहुंचने, लोगों से मिलने और जमीनी हकीकत को समझने का साहस भी होना चाहिए। ताकसिंग भारत का कोई सुदूर कोना नहीं है। यह भारत की अग्रिम पंक्ति है।"प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से सुरक्षा प्रोटोकॉल के अधीन ताकसिंग और अन्य संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसदों को मिलाकर एक संयुक्त सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे दौरे से लोकतांत्रिक निगरानी और राष्ट्रीय सहमति मजबूत होगी, जबकि निर्वाचित प्रतिनिधियों को सीमावर्ती समुदायों, सुरक्षाकर्मियों एवं नागरिक अधिकारियों के साथ सीधे संवाद करने और बुनियादी ढांचे एवं जमीनी स्थिति का आकलन करने का अवसर मिलेगा।

श्री सिरम ने पीएलए (चीनी सेना) की गतिविधियों या अतिक्रमण सहित सीमा पर घटनाक्रम से जुड़ी रिपोर्टों और चिंताओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों से सत्यापित व प्रामाणिक जानकारी भी मांगी। उन्होंने सुदूर और कठिन सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाकर्मियों के लिए पर्याप्त एवं निर्बाध रसद सहायता, उपकरण, संचार सुविधाएं, आवास, चिकित्सा सहायता और जनशक्ति उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से सीमावर्ती क्षेत्रों में हर मौसम में खुली रहने वाली सड़कों और पुलों, दूरसंचार व इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली, स्वास्थ्य सेवा, विद्यालयों, पीने के पानी, स्वच्छता, आपातकालीन निकासी सुविधाओं और नागरिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए समयबद्ध कदम उठाने का भी आग्रह किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य की रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए समर्पित 'अरुणाचल रेजीमेंट' के गठन पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि लागू भर्ती नीतियों और रक्षा आवश्यकताओं के अधीन अरुणाचल प्रदेश के स्वदेशी आदिवासी युवा ऐसी रेजीमेंट का एक बड़ा हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने इसके लिए राज्य के कठिन भू-भाग, जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों से उनकी परिचितता का हवाला दिया।

श्री सिरम ने कहा, "अरुणाचल प्रदेश के बेटे-बेटियां पहाड़ों, घाटियों, नदियों, जंगलों और सीमावर्ती इलाकों को किसी अन्य की तुलना में बेहतर जानते हैं।" उन्होंने कहा कि उनका स्थानीय ज्ञान और सहनशीलता एक रणनीतिक संपत्ति साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव का परीक्षण उपयुक्त रक्षा अधिकारियों के परामर्श से और सशस्त्र बलों में भर्ती को नियंत्रित करने वाले मौजूदा संवैधानिक, कानूनी और संस्थागत ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "ताकसिंग के लोग भारत के बाहरी छोर पर नहीं रह रहे हैं। वे भारत की अग्रिम पंक्ति पर रह रहे हैं। यदि देश उनसे सीमा पर मजबूती से डटे रहने की उम्मीद करता है, तो देश को भी उनके पीछे मजबूती से खड़ा होना होगा।" उन्होंने सीमावर्ती निवासियों से शांत, सतर्क और एकजुट रहने की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि प्रदेश कांग्रेस राज्य सरकार, केंद्र और संसद के समक्ष उनकी चिंताओं को उठाना जारी रखेगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित