काबुल , अगस्त 28 -- तालिबान ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना की वापसी के पांच साल बाद अफगानिस्तान 'निस्संदेह' बेहतर स्थिति में है।

तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने यह बात स्वीकार करते हुए कही कि देश अब भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। आरटी को दिये साक्षात्कार में श्री मुजाहिद ने तर्क दिया कि विदेशी सैनिकों की रवानगी ने देश की स्वतंत्रता को बहाल किया है और युद्धग्रस्त राष्ट्र के पुननिर्माण की जिम्मेदारी वापस अफगानों के हाथों में सौंप दी है।

पश्चिम समर्थित सरकार के पतन के बाद अगस्त 2021 में तालिबान सत्ता में लौटा और दो दशकों तक चले युद्ध के बाद अमेरिकी सेना ने अपनी वापसी पूरी की। तब से इस कट्टरपंथी इस्लामी आंदोलन ने शरिया कानून की बेहद सख्त व्याख्या को पुन: लागू किया है, जिसमें महिलाओं और लड़कियों पर व्यापक प्रतिबंध शामिल हैं, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कड़ी आलोचना हुई है।

श्री मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान अब अमेरिका से राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना चाहता है, जिसमें काबुल में अमेरिकी दूतावास और वाशिंगटन में अफगान राजनयिक मिशन को फिर से खोलना शामिल है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि तालिबान के प्रति अंतरराष्ट्रीय धारणा अब भी वर्षों के संघर्ष से प्रभावित है। उन्होंने पश्चिमी मीडिया पर आरोप लगाया कि वह इस आंदोलन को अस्थिरता फैलाने और बाहरी दुनिया के लिए खतरा पैदा करने वाले संगठन के रूप में चित्रित कर रहा है।

उन्होंने विदेशी सरकारों और पत्रकारों से तालिबान के साथ सीधे जुड़ने और 'हमारे लक्ष्यों को समझने' का आग्रह करते हुए कहा, "लेकिन अब युद्ध समाप्त हो चुका है और मेरा मानना है कि युद्धकालीन राजनीतिक और मीडिया दोनों नीतियों में बदलाव होना चाहिए।"श्री मुजाहिद ने अफगानिस्तान के खिलाफ लगे प्रतिबंधों को हटाने और उसकी सभी जब्त वित्तीय संपत्तियों को वापस लौटाने की भी मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे कदमों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ संबंधों को सुधारने में मदद मिलेगी।

उन्होंने रूस को महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार बताते हुए कहा कि अफगानिस्तान चाहता है कि रूसी कंपनियां यहां निवेश करें और व्यापार, पुनर्निर्माण, ईंधन तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करें।

तालिबान प्रवक्ता ने इस विचार को भी खारिज कर दिया कि अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बदले अपनी घरेलू नीतियों में बदलाव करना चाहिए। महिलाओं और लड़कियों पर लगाये गये प्रतिबंधों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने तर्क दिया कि अफगानिस्तान पहले से ही राज्य होने की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करता है और उस पर अतिरिक्त शर्तें नहीं थोपी जानी चाहिए।

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