वॉशिंगटन , जून 05 -- अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) ने रात भर चली बहस के बाद गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की प्रवास नियंत्रण एजेंसियों के लिए लंबे समय से रुके धन आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सांसदों ने शुक्रवार सुबह एक मामूली अंतर (52 के मुकाबले 47 मतों) से लगभग 70 अरब डॉलर के इस प्रस्ताव को पारित कर दिया। इससे सीमा सुरक्षा और प्रवास नियंत्रण विभाग (आईसीई) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शेष कार्यकाल के लिए जरूरी बजट मिल गया है।
अलास्का से रिपब्लिक पार्टी की सांसद लिसा मुर्कोव्स्की ने इस प्रस्ताव का विरोध करने में विपक्षी दल का साथ दिया। अब यह विधेयक मंज़ूरी के लिए संसद के निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) के पास जाएगा।
सीबीएस न्यूज के अनुसार, सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने इस प्रस्ताव को 'बजट सामंजस्य' (बजट रिकन्सिलिएशन) प्रक्रिया के ज़रिए आगे बढ़ाया। अमेरिकी संसद में यह आर्थिक और कर से जुड़े कानूनों को बिना विपक्षी समर्थन के तेजी से पास कराने की एक विशेष प्रक्रिया है। इस विधेयक को अंतिम मंजूरी 18 घंटे से अधिक समय तक चली मैराथन मतदान प्रक्रिया (वोट-अ-रामा) के बाद मिली, जिसके दौरान सांसदों ने दर्जनों संशोधनों पर विचार किया।
हालांकि इस विधेयक का मुख्य ध्यान प्रवास नियंत्रण को धन देना था, लेकिन बहस का एक बड़ा हिस्सा न्याय विभाग के विवादास्पद 'उत्पीड़न विरोधी' कोष (एंटी-वेपनाइजेशन) पर केंद्रित रहा। यह एक ऐसा प्रस्ताव था जिसके तहत उन लोगों को सरकारी खजाने से मुआवजा देने की बात कही गई थी, जिनका दावा था कि पिछली सरकार ने उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया था।
इस कोष को विपक्षी दल की ओर से तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था और इसने सत्तारूढ़ दल के भीतर भी मतभेद पैदा कर दिए थे। इसी आपसी कलह के कारण अवकाश से पहले इसे मंजूरी देने की योजना टल गई थी।
मतदान से पहले, सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने सरकार से यह आश्वासन मांगा था कि इस कोष को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। कार्यकारी महान्यायवादी टॉट ब्लैंश ने इस सप्ताह सांसदों को बताया कि सरकार इस कार्यक्रम को 'आगे नहीं बढ़ा रही है'। हालांकि, उनके लिखित रूप में जिम्मेदारी लेने से इनकार करने और श्री ट्रंप द्वारा सार्वजनिक रूप से इस विचार की प्रशंसा जारी रखने के कारण कुछ सांसद पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे।
विपक्षी दल ने इस लंबी संशोधन प्रक्रिया के दौरान लगातार इन चिंताओं का फायदा उठाने की कोशिश की। इस कार्यक्रम से जुड़े धन को रोकने के लिए विपक्ष के नेतृत्व में लाया गया एक शुरुआती संशोधन 50 के मुकाबले 49 मतों से गिर गया। सत्तारूढ़ दल के कुछ सांसदों ने भी इस उपाय का समर्थन करने में विपक्ष का साथ दिया था।
इसके अलावा, एक अन्य सांसद थॉम टिलिस के अलग संशोधन में इस कोष के लिए तय पैसे को धोखाधड़ी रोकने वाले कार्यों में लगाने की मांग की गई थी। इसे दोनों पक्षों का समर्थन तो मिला, लेकिन यह भी पारित नहीं हो सका।
दिन और रात भर इस प्रस्तावित कोष को सीमित करने या बदलने के लिए कई अन्य संशोधन भी पेश किए गए, लेकिन किसी को भी जरूरी मत नहीं मिल सके। इनमें से एक प्रमुख प्रस्ताव दो अन्य सांसदों की तरफ से आया था, जिसमें इस पैसे को पिछले वर्ष संसद भवन पर हुए हमले के दौरान परिसर की रक्षा करने वाले सुरक्षा अधिकारियों की मदद में लगाने की मांग की गई थी। यह संशोधन भी खारिज हो गया।
इस बहस ने सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं के भीतर बनी बेचैनी को साफ कर दिया, भले ही पार्टी नेता इस बड़े आवंटन प्रस्ताव को पास कराने की कोशिशों में जुटे रहे।
सदन में बहुमत के नेता जॉन थ्यून ने सरकार के आश्वासनों का बचाव करते हुए महान्यायवादी के बयान को 'अंतिम और स्पष्ट' बताया। श्री थ्यून ने संवाददाताओं से कहा, "मैं जानता हूँ कि राष्ट्रपति के इस बारे में मिले-जुले विचार हैं, लेकिन इसे स्थापित करने का काम महान्यायवादी का ही होगा।"न्याय विभाग के इस कोष पर मचे घमासान से पहले, सत्तारूढ़ दल को राष्ट्रपति भवन के पूर्वी हिस्से के पुनरुद्धार के लिए जारी एक अरब डॉलर के प्रस्ताव को भी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था, जहाँ एक बड़ा सभाकक्ष बनाने की योजना थी।
इस मतदान के साथ ही संसद वित्तीय वर्ष 2026 के धन आवंटन को लेकर चल रहे लंबे विवाद को खत्म करने के करीब पहुँच गई है। बता दें कि इस विवाद के कारण पिछले साल शासकीय कामकाज पूरी तरह ठप रहा था और इस साल की शुरुआत में भी आंशिक रूप से काम रुका था।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित