वाशिंगटन , अगस्त 26 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ 30 साल के असैन्य परमाणु सहयोग समझौते का प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस को भेजा है, लेकिन व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता तभी आगे बढ़ेगा जब रियाद इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने पर सहमत होगा।
जुलाई में हुए इस समझौते को सोमवार को कांग्रेस के समक्ष पेश किया गया। इसके तहत अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब को असैन्य परमाणु तकनीक निर्यात करने की अनुमति मिलेगी। इसमें एपी 1000 परमाणु रिएक्टरों की स्थापना की योजना भी शामिल है। इस परियोजना का संभावित मूल्य अरबों डॉलर का है और इससे कनाडा की कंपनी कैमेको तथा ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट के संयुक्त स्वामित्व वाली वेस्टिंगहाउस को लाभ हो सकता है।
द टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट में अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया कि श्री ट्रंप का रुख नहीं बदला है। यह समझौता तभी आगे बढ़ेगा जब सऊदी अरब अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करेगा। अब्राहम समझौते के तहत अमेरिका की मध्यस्थता में संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किये थे।
यह शर्त इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई में समझौता होने के समय सऊदी-इजरायल संबंध सामान्य करने की स्पष्ट शर्त शामिल नहीं थी। इसके बाद इजरायल और उसके समर्थकों ने बिना ऐसी शर्त के सऊदी अरब के साथ परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने का विरोध किया था।
समझौता अब कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया में जाएगा, जो 90 सत्र दिनों तक चल सकती है। यह स्पष्ट नहीं है कि कांग्रेस में समझौता भेजने से सऊदी अरब द्वारा इजरायल को औपचारिक मान्यता देने के ट्रंप प्रशासन के व्यापक प्रयास को किस तरह आगे बढ़ाया जा सकेगा।
सऊदी अरब और इजरायल के बीच सामान्यीकरण की राह में सबसे बड़ी अड़चनों में फिलिस्तीनी मुद्दा शामिल है। रियाद ने इजरायल को मान्यता देने से पहले फिलिस्तीनी राज्य के गठन की दिशा में एक अपरिवर्तनीय रास्ते की मांग की है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार इस मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुके हैं।
सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंध 2023 में सामान्य करने के अमेरिकी प्रयासों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई थी, लेकिन सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध ने इस प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सामान्यीकरण की संभावनाएं और मुश्किल हुई हैं।
इस परमाणु समझौते को परमाणु अप्रसार से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। 2009 में अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते के विपरीत, सऊदी अरब के साथ प्रस्तावित समझौते में यूरेनियम संवर्धन या इस्तेमाल किये गये परमाणु ईंधन के पुनर्संसाधन पर स्पष्ट रोक नहीं है। ऐसी तकनीक का इस्तेमाल परमाणु हथियार विकसित करने में किया जा सकता है।
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