वॉशिंगटन , मई 15 -- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने चीन को चेतावनी दी है कि ताइवान पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। ताइवान की यथास्थिति बदलने की चीन का कोई भी प्रयास 'भयानक गलती' होगी।

श्री रुबियों ने शुक्रवार को एनबीसी न्यूज से बात करते हुए यह टिप्पणी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ यात्रा के दौरान की। लगभग एक दशक में किसी अमेरिकी नेता की चीन की यह पहली राजकीय यात्रा है, जो मुख्य रूप से ईरान युद्ध, व्यापार विवाद, ताइवान और एआई प्रतिद्वंद्विता जैसे विषयों पर केंद्रित है।

श्री ट्रंप की इस यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को 'चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा' बताया और चेतावनी दी कि इन दो आर्थिक महाशक्तियों के इस मुद्दे के किसी भी कुप्रबंधन से चीन-अमिरका के बीच 'टकराव या संघर्ष' पैदा हो सकता है।

श्री रूबियो ने इस बात पर जोर दिया, ''ताइवान के मुद्दे पर अमेरिकी नीति आज की तारीख तक और आज यहां हुई हमारी बैठक तक अपरिवर्तित है।" उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि उनका रुख क्या है और मुझे लगता है कि वे भी जानते हैं कि हमारा रुख क्या है।"इस द्वीप राष्ट्र पर संभावित चीनी आक्रमण के संबंध में श्री रूबियो ने चीन को आगाह करते हुए कहा, "इसे बलपूर्वक या इस तरह की किसी भी अन्य कोशिश से हासिल करना भयानक गलती होगी।" उन्होंने चेतावनी दी, "इसके वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम होंगे, जो केवल अमेरिका तक ही सीमित नहीं रहेंगे।"उन्होंने हालांकि यह भी स्वीकार किया कि चीन यह पसंद करेगा कि ताइवान अपनी सहमति से उसके साथ आये और 'आदर्श स्थिति' में 'किसी मतदान या जनमत संग्रह' से स्वेच्छा से उनके साथ जुड़ जाए। फिर भी, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस द्वीप राष्ट्र को वैसा ही रहना चाहिए जैसा वह वर्तमान में है।

श्री रूबियो ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका ताइवान पर 'सामरिक अस्पष्टता' के सिद्धांत का पालन करता है। यह एक लंबे समय से चली आ रही नीति है। इसके तहत जानबूझकर इस बात को अस्पष्ट रखा जाता है कि चीनी आक्रमण की स्थिति में अमेरिका ताइवान की सैन्य रक्षा के लिए आगे आयेगा या नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा, "यह दृष्टिकोण कई राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के दौरान बना रहा है और अब भी यही है।"उन्होंने ताइवान को बड़े पैमाने पर अमेरिकी हथियारों की बिक्री की संभावना पर कहा कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता में 'प्रमुखता से शामिल नहीं था'। उन्होंने कहा कि भविष्य में हथियारों की खेप भेजने के संबंध में कोई भी निर्णय काफी हद तक कांग्रेस (अमेरिकी संसद) पर निर्भर करता है।

चीन लंबे समय से ताइवान को अपने संप्रभु क्षेत्र का हिस्सा मानता रहा है। यह एक ऐसा रुख है, जिसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार तो किया जाता है, लेकिन यह अनिश्चित भी बना हुआ है, क्योंकि अधिकतर देश ताइवान पर दावा करने की चीन की किसी भी कोशिश के खिलाफ हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित