तेहरान/वॉशिंगटन , मई 28 -- अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों ने कथित तौर पर एक 60-दिवसीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के मसौदे पर सहमति बना ली है। हालांकि, इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की अंतिम मंज़ूरी का इंतज़ार है।
यह जानकारी बातचीत से परिचित अमेरिकी अधिकारियों और क्षेत्रीय मध्यस्थों के हवाले से दी गयी है।
एक्सिओस की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रस्तावित रूपरेखा युद्ध की शुरुआत के बाद से दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है। हालांकि, अधिकारियों ने आगाह किया है कि सबसे अधिक विवादित परमाणु और सुरक्षा मुद्दों को सुलझाने वाले किसी व्यापक समझौते तक पहुंचने के लिए अभी भी कठिन वार्ताओं की आवश्यकता होगी।
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "यह एक ऐसा समझौता है जिसके ज़रिए सभी पक्षों को बातचीत की मेज़ पर लाया जा सके। हम बातचीत के दौरान बाकी विवरणों पर काम करेंगे।"मध्यस्थता के प्रयासों में शामिल अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार तक अधिकांश शर्तें तय हो चुकी थीं, लेकिन आगे बढ़ने के लिए दोनों पक्षों को अभी भी अपने शीर्ष नेतृत्व से मंज़ूरी मिलना बाकी था।
अमेरिकी वार्ताकारों ने बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सूचित किया कि ईरानी प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि तेहरान से आवश्यक अधिकार प्राप्त होने के बाद वे समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं; हालांकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की है। ट्रंप की ओर से भी इस समझौते को अभी अंतिम मंज़ूरी मिलना बाकी है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया, "राष्ट्रपति ने मध्यस्थों को संदेश दिया है कि वे इस पर विचार करने के लिए कुछ दिनों का समय चाहते हैं।"अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित एमओयू के तहत 'होर्मुजु जलडमरूमध्य से होने वाला जहाज़ी आवागमन "बाधारहित" हो जाएगा।
अमेरिका का कहना है कि इसका अर्थ यह होगा कि वहां कोई टोल टैक्स नहीं लगेगा, वाणिज्यिक जहाजों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और 30 दिनों के भीतर जलडमरूमध्य से ईरान द्वारा बिछाई गई सभी नौसैनिक बारूदी सुरंगों को हटा दिया जाएगा।
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को भी धीरे-धीरे हटा लिया जाएगा, जो कि इस जलमार्ग से सामान्य वाणिज्यिक आवागमन की बहाली के साथ-साथ आगे बढ़ेगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस मसौदे में ईरान की ओर से परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता शामिल है। वहीं 60-दिवसीय इस समय-सीमा के दौरान होने वाली बातचीत के पहले चरण में तेहरान के पास मौजूद 'अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम' के भंडार और देश के भीतर यूरेनियम संवर्धन के भविष्य जैसे मुद्दों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अमेरिका भी प्रतिबंधों में राहत देने, ईरान के ज़ब्त किए गए धन को जारी करने तथा मानवीय सहायता और आवश्यक वस्तुओं को ईरान में अधिक सुगमता से पहुंचाने के लिए आवश्यक तंत्र स्थापित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सहमत होगा। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तनाव के लगातार बने रहने के बावजूद, दोनों पक्षों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहा है।
खबरों के मुताबिक पिछले 48 घंटों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य और उसके आस-पास अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच दो अलग-अलग झड़पें हुई हैं। इससे यह बात साफ हो जाती है कि संघर्ष-विराम कितना नाज़ुक है, ठीक उस समय जब राजनयिक इस समझौते को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
एक अमेरिकी अधिकारी ने प्रस्तावित समझौते को ईरान के लिए "अपनी अर्थव्यवस्था को आज़ाद करने" का एक मौका बताया।
अधिकारी ने कहा, "उनके सिस्टम में ऐसे लोग हैं जो समझते हैं कि यह एक अलग दिशा में आगे बढ़ने का मौका है।" उन्होंने आगे कहा, "60 दिनों की बातचीत के दौरान हमें पता चल जाएगा कि क्या वाकई ऐसा है।"अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि प्रतिबंधों या आर्थिक रियायतों से जुड़े "कोई भी अलग से सौदे या गुप्त शर्तें" नहीं होंगी।
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