इस्लामाबाद , जुलाई 30 -- पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने का हर संभव प्रयास कर रहा है तथा इस बात पर बल दिया कि 'जारी संघर्ष को सुलझाने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता कूटनीति ही है।'पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान संवाद का समर्थन करना जारी रखे हुए है और शामिल पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, "मौजूदा तनाव और दुश्मनी के बीच, पाकिस्तान दोहराता है कि संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है।"श्री अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान को बातचीत फिर से शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने में 'भरसक प्रयास' कर रहा है और युद्धविराम बनाए रखने तथा राजनयिक जुड़ाव को फिर से शुरू करने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करता है।

पाकिस्तान ने दुश्मनी बढ़ने के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसमें इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी करना और एक अस्थायी युद्धविराम को सुगम बनाने में मदद करना शामिल है।

यह राजनयिक प्रयास तब सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह घोषणा की कि श्रृंखलाबद्ध जवाबी हमलों के बाद अंतरिम समझौता टूट गया है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने और समझौते के तहत तकनीकी चर्चा जारी रखने का आग्रह किया है।

रात भर ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने संघर्ष को और बढ़ाने की धमकी दी।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी ने गुरुवार को कहा कि वह 'आज हमलावर को दंडित करेगा'। साथ ही आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि इस संघर्ष में अमेरिका का समर्थन करने वाले देशों को भी 'कड़ा जवाब मिलेगा।'आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि वह महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर 'पूर्ण नियंत्रण' बनाए हुए है। ईरानी सेना ने कहा कि विदेशी शक्तियों को इस क्षेत्र में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

आईआरजीसी की यह चेतावनी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर ईरानी बलों द्वारा मिसाइल हमले किए जाने के बाद आई है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इन हमलों को पश्चिमी एशिया में अमेरिकी बलों पर ईरानी हमलों के प्रयासों का 'करारा जवाब' बताया। इस अभियान में ईरान भर में आईआरजीसी के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें सैन्य कमान केंद्र, मिसाइल और ड्रोन ठिकाने, तटीय निगरानी प्रणालियां, वायु रक्षा ठिकाने और समुद्री संपत्तियां शामिल हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य अमेरिकी बलों, व्यावसायिक जहाजरानी और पड़ोसी खाड़ी देशों के लिए ईरान और उससे जुड़े समूहों द्वारा पैदा किए गए खतरों को कम करना था।

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