हमीरपुर , अप्रैल 26 -- अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से उत्तर प्रदेश में सड़कों के निर्माण के लिए आवश्यक डामर (बिटुमिन) का संकट गहरा गया है। इसका असर हमीरपुर जिले में लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की सड़क परियोजनाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। कई सड़कें अधर में लटक गई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता (एसई) सुनील कांत ने रविवार को बताया कि सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला डामर क्रूड ऑयल से तैयार होता है और भारत में इसके लिए ईरान सहित अन्य देशों से कच्चे तेल का आयात किया जाता है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव से इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है।

उन्होंने बताया कि जब ठेकेदारों ने टेंडर डाले थे, उस समय डामर की कीमत लगभग 42 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन थी, लेकिन अब जीएसटी सहित यह बढ़कर करीब एक लाख रुपये प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। डामर की कीमतों में इस भारी वृद्धि से ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।

अधिकारियों के अनुसार मई-जून तक ही नई और पुरानी ग्रामीण सड़कों का निर्माण, मरम्मत और लेपन कार्य किया जाता है, क्योंकि जुलाई से वर्षा शुरू होने पर काम बंद हो जाता है। ऐसे में डामर की कमी ने सड़क निर्माण कार्यों को और प्रभावित कर दिया है।

जिले में करीब एक दर्जन सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि कई सड़कों पर लेपन होना है, लेकिन डामर उपलब्ध न होने के कारण ठेकेदार काम रोककर बैठे हैं। विभागीय अभियंताओं और ठेकेदारों के बीच निर्माण और समयसीमा को लेकर लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है।

अभियंताओं का कहना है कि डामर महंगे दाम पर खरीदकर भी सड़क निर्माण पूरा किया जाए, जबकि ठेकेदारों का तर्क है कि डामर के लिए जितना आगणन स्वीकृत हुआ है, उसी सीमा में कार्य संभव है। सूत्रों के अनुसार डामर की कमी के चलते कुछ ठेकेदार गुणवत्ता से समझौता कर सड़क निर्माण कराने में भी जुट गए हैं, जिससे विभाग की चिंता और बढ़ गई है।

हमीरपुर-राठ-कुछेछा तथा गरौठा मार्ग की करीब 25 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना में बढ़ती लागत के कारण रेट रिवाइज के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। लगभग 90 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क पर अब करीब 140 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।

लोनिवि निर्माण शाखा-दो के अधिशासी अभियंता डीपी वर्मा ने बताया कि पहले से सड़क निर्माण की लागत काफी बढ़ गई है। कुछ परियोजनाओं का रेट रिवाइज कराया जा रहा है, लेकिन अधिकांश सड़कें ठेकेदारों को निर्धारित समय में पूरी करनी ही होंगी। उन्होंने कहा कि डामर की उपलब्धता सुनिश्चित करना ठेकेदारों की जिम्मेदारी है और यह पूरा मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है। फिलहाल डामर संकट के कारण जिले में सड़क निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है और यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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