अटलांटा , अक्टूबर 31 -- अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया प्रशांत आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री और आर्थिक सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए हैं। तीनों देशों ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अटलांटा में जी-20 बैठक से इतर जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से मुलाकात की। इस दौरान तीनों नेताओं ने एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत त्रिपक्षीय आर्कटिक-प्रशांत साझेदारी (टीएपीपी) स्थापित की गई।
तीनों विदेश मंत्रियों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को पूरी तरह लागू करने का आह्वान किया। इनमें उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए राजस्व जुटाने के प्रयासों को रोकने के उपाय भी शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, तीनों नेताओं ने उत्तर कोरिया द्वारा संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के उल्लंघन और उनसे बचने के प्रयासों का दस्तावेजीकरण करने के लिए बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी दल की भी सराहना की।
उन्होंने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। श्री रुबियो ने दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों, पूर्वी चीन सागर और पीला सागर में वाशिंगटन द्वारा जबरदस्तीपूर्ण व्यवहार बताए गए कदमों तथा चीन और रूस के बीच बढ़ते सहयोग पर भी चिंता जताई।
आर्थिक सुरक्षा के मुद्दे पर तीनों मंत्रियों ने आर्थिक दबाव बनाने और आपूर्ति शृंखलाओं को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का विरोध किया। उन्होंने छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों की तैनाती से जुड़े त्रिपक्षीय समझौते की प्रगति की भी समीक्षा की। इस समझौते पर सात जुलाई को अंकारा में हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए तीनों देशों की औद्योगिक क्षमताओं का उपयोग करना है।
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