वाशिंगटन/ तेहरान , मई 06 -- अमेरिका और ईरान दो माह से चले आ रहे युद्ध को खत्म करने के करीब आ रहे हैं और दोनों देशों के बीच बातचीत एक संक्षिप्त समझौते के विवरण पर केंद्रित है। एक्सियोस की एक रिपोर्ट में बुधवार को यह दावा किया गया।
रिपोर्ट में कई अमेरिकी अधिकारियों और मामले के जानकार सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अमेरिका को कई अहम प्रावधानों पर ईरान के जवाब का इंतजार है और अभी तक वे किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंचे हैं।
प्रस्तावित ढांचे में एक 14-सूत्री समझौता है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच फौरन युद्धविराम शुरू हो जाएगा और फिर 30 दिन तक विस्तृत बातचीत होगी। इस योजना के तहत ईरान अस्थायी रूप से परमाणु संवर्धन रोक देगा, जबकि अमेरिका को ईरान से प्रतिबंध हटाकर उसे अरबों डॉलर की संपत्ति जारी करनी होगी।
दोनों पक्षों से होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने की भी उम्मीद है, जिसमें परिवहन पर रोक और समुद्री नाकेबंदी कम करना शामिल है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक पाकिस्तानी सूत्र ने कहा कि बातचीत 'बहुत जल्द' खत्म हो सकती है। फरवरी के आखिर में लड़ाई शुरू होने के बाद से पाकिस्तान ने एक अहम बिचौलिए की भूमिका निभाई है, इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी की है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आसान बनाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को रोकने की घोषणा किये जाने के कुछ ही घंटों बाद कूटनीतिक प्रयासों ने ज़ोर पकड़ लिया, हालांकि व्यापक समुद्री प्रतिबंध अभी भी लागू हैं।
एक्सियोस के अनुसार, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुशनर प्रत्यक्ष और बैक चैनल संचार के माध्यम से बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं।
कुछ अहम मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, खासकर ईरान के संवर्धन पर रोक की अवधि। जहां एक ओर अमेरिका 20 साल तक की अवधि पर ज़ोर दे रहा है, वहीं ईरान ने पांच साल का प्रस्ताव रखा है। ख़बरों के मुताबिक, 12 से 15 साल की अवधि पर एक संभावित समझौते को लेकर चर्चा चल रही है।
विचाराधीन अतिरिक्त प्रावधानों में अधिक कठोर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण, भूमिगत परमाणु सुविधाओं पर सीमाएं और ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को संभवतः हटाना या स्थानांतरित करना शामिल है। प्रगति के संकेत मिलने के बावजूद, अमेरिकी अधिकारियों ने आगाह किया है कि ईरान के नेतृत्व के भीतर मौजूद मतभेद अंतिम मंज़ूरी की प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस प्रक्रिया की जटिलता को स्वीकार करते हुए प्रतिबद्धताओं और रियायतों के क्रम को लेकर स्पष्टता की आवश्यकतापर ज़ोर दिया है।
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