अमृतसर , जून 19 -- विश्व प्रसिद्ध अमृतसरी कुलचे को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने के उद्देश्य से शुक्रवार को जिला उपायुक्त कार्यालय, अमृतसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी।

बैठक की अध्यक्षता पंजाब सरकार के खाद्य प्रसंस्करण विभाग के विशेष सचिव संदीप हंस ने की। इसमें शहर के कुलचा निर्माताओं, व्यापारियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान संदीप हंस ने कहा कि अमृतसरी कुलचा केवल एक खाद्य उत्पाद नहीं, बल्कि अमृतसर की सांस्कृतिक पहचान और पंजाब की समृद्ध खान-पान विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जीआई टैग मिलने से अमृतसरी कुलचे को कानूनी और विशिष्ट पहचान प्राप्त होगी, जिससे देश और विदेश में इसकी असली पहचान और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि जीआई टैग मिलने के बाद अमृतसरी कुलचे के नाम पर नकली उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव होगी। इससे उपभोक्ताओं को असली उत्पाद मिलेगा और स्थानीय व्यापारियों तथा कारीगरों के हित भी सुरक्षित रहेंगे। इस अवसर पर पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (पीएससीएसटी) की संयुक्त सचिव डॉ. दपिंदर कौर बक्शी ने कहा कि अमृतसरी कुलचे को वैश्विक स्तर पर नयी पहचान दिलाने के लिए तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले पंजाब की पारंपरिक कला फुलकारी को भी जीआई टैग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा चुकी है।

डॉ. बक्शी ने व्यापारियों से अपील की कि जीआई टैग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले एक संगठन या एसोसिएशन का गठन किया जाए, क्योंकि आधिकारिक आवेदन इसी संस्था के माध्यम से किया जा सकेगा।

बैठक में मौजूद कुलचा व्यापारियों ने सरकार और प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पहली बार उनके पारंपरिक व्यवसाय को इतनी गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने इसे अमृतसर की विरासत को संरक्षित करने और असली अमृतसरी कुलचे की पहचान को कायम रखने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत जीआई टैग प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए पीएससीएसटी , गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के फूड टेक्नोलॉजी विभाग, जिला प्रशासन और खाद्य प्रसंस्करण विभाग की संयुक्त समन्वय समिति गठित की जाएगी।

यह समिति कुलचा निर्माताओं की एसोसिएशन के गठन से लेकर जीआई टैग के लिए आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया तक सभी कार्यों की निगरानी करेगी। जिला प्रशासन ने अतिरिक्त उपायुक्त (सामान्य) को इस परियोजना का नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

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