अमरोहा , सितंबर 17 -- उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य के विलंबित भुगतान पर ब्याज की वसूली को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक सरदार वी.एम. सिंह 18 सितंबर को अमरोहा पहुंचकर किसानों के साथ आगे की रणनीति की घोषणा करेंगे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 31 अगस्त को गन्ना किसानों के बकाये और विलंबित भुगतान पर ब्याज की वसूली को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को संशोधित रिकवरी सर्टिफिकेट के आधार पर बकाये की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी.एम. सिंह की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने कुछ रिकवरी सर्टिफिकेट में 15 प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत ब्याज दर्ज किए जाने का संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले में पूर्व गन्ना आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी, प्रभु एन. सिंह, प्रमोद कुमार उपाध्याय और मिनीस्टी एस. को व्यक्तिगत पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उनसे यह भी पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार विभिन्न रिकवरी सर्टिफिकेटों के तहत करीब 4,405 करोड़ रुपये का मूल बकाया था, जिसमें से लगभग 3,318.50 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। 15 प्रतिशत की दर से ब्याज की राशि करीब 849.52 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि ब्याज मद में अब तक वसूली नहीं हुई है। मूलधन और ब्याज मिलाकर करीब 1,936 करोड़ रुपये की राशि लंबित है।

अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि कुछ रिकवरी सर्टिफिकेट में 12 प्रतिशत की दर से ब्याज दर्ज किए जाने से करीब 170 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की वसूली प्रभावित हो सकती है। अदालत ने संशोधित रिकवरी सर्टिफिकेट के आधार पर जिलाधिकारियों को बकाये की वसूली के प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।

उधर, अमरोहा में जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के बाहर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। किसान पेराई सत्र 1996-97 से 2025-26 तक विलंबित गन्ना मूल्य भुगतान का किसानवार और सत्रवार ब्याज विवरण उपलब्ध कराने तथा देय ब्याज की वसूली की मांग कर रहे हैं। इससे पहले संगठन की ओर से भी किसानों को 14 दिन से अधिक विलंब पर 15 प्रतिशत ब्याज के विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

संगठन के अनुसार अमरोहा की वेब शुगर मिल, धनौरा पर विलंबित भुगतान के ब्याज के 39 करोड़ रुपये से अधिक बकाये का मामला भी आंदोलन में उठाया जा रहा है। किसानों ने कहा है कि उन्हें पिछले वर्षों के विलंबित भुगतान का पूरा हिसाब और नियमानुसार देय ब्याज मिलने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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