अमरोहा , अक्टूबर 15 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा में भूजल की समस्या से त्रस्त लोग पीने के पानी के लिये हर महीने 600 रुपये कैंपर में खर्च करने को मजबूर है। दूसरी ओर जिले के 953 राजस्व गांवों में जल जीवन मिशन के तहत 4,519 महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट से पेयजल परीक्षण का प्रशिक्षण दिया गया है। जिले के नगरीय क्षेत्र मंडी धनौरा के चामुंडा मोहल्ले में घरेलू आरओ बार-बार चोक होने और रख-रखाव के भारी खर्च से तंग आकर लोगों ने उसका उपयोग बंद कर दिया है और अब पीने के लिए हर माह करीब 600 रुपये के कैंपर खरीद रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग ने अब तक मोहल्ले के पानी की जांच नहीं कराई है। गृहिणी आर.बाला के अनुसार आरओ की सर्विस और खराब होते पुर्जों पर प्रतिमाह 1,000 से 1,500 रुपये तक खर्च हो रहे थे।हर महीने आर्थिक बोझ होने पर मजबूरी में आरओ बंद करना पड़ा। 600 रुपये प्रति महिना कैंपर से पीने का पानी तो मिल रहा है, पर दैनिक उपयोग के पानी की समस्या जस की तस है। टंकियों और पाइपलाइनों में जमाव तथा शौचालय की सिस्टर्न में रुकावट के कारण मोहल्लेवासियों को सफाई के लिए बार-बार प्लंबर बुलाना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का मानना है कि पानी में ठोस कणों या खनिजों का अत्यधिक जमाव इसका कारण है, मगर प्रयोगशाला जांच के बिना इसकी पुष्टि संभव नहीं है। भारतीय मानक ब्यूरो के पेयजल मानक आईएस 10500:2012 के अनुसार कुल घुलित ठोस (टीडीएस) की स्वीकार्य सीमा 500 मिलीग्राम प्रति लीटर और कठोरता की 200 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जबकि वैकल्पिक स्रोत न होने की स्थिति में ही क्रमशः 2000 और 600 मिलीग्राम प्रति लीटर तक छूट दी गई है। मोहल्ले के पानी में ये मात्राएं कितनी हैं, यह जांच के बिना पता नहीं चल सकता।
दूसरी ओर जिले के 953 राजस्व गांवों में जल जीवन मिशन के तहत 4,519 महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट से पेयजल परीक्षण का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रदेश में इस योजना में हर राजस्व गांव की पांच महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है और किट से नल, कुएं व हैंडपंप के पानी की करीब 12 प्रकार की जांच की जा सकती है। पर नगरीय क्षेत्र में आने वाले चामुंडा मोहल्ले में ऐसी कोई निगरानी व्यवस्था नहीं है।
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