अमरोहा , अक्टूबर 18 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा में गंगा तट तिगरी धाम में रविवार को आयोजित 'किसान युवा संसद' में 'अंगूरी देवी धर्मशाला प्रस्ताव' के जरिए गढ़-तिगरी राजकीय मेले में वीआईपी और आम श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं के कथित 80-20 फीसदी अंतर का मुद्दा उठा।
भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) ने उत्तरी भारत के प्रसिद्ध धार्मिक व आध्यात्मिक राजकीय गढ़गंगा-तिगरी मेले की तैयारियों की निगरानी के लिए जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और किसान संगठनों की संयुक्त समिति बनाने की मांग की। संगठन ने 80-20 के अनुपात के जरिए कथित असमानता पर सवाल उठाया, हालांकि बजट के ऐसे किसी बंटवारे का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने मुख्य संबोधन में कहा कि संगठन किसानों के साथ युवाओं और श्रमिकों के सवालों पर भी सामाजिक दायित्व निभाता है। संसद में श्रद्धालुओं की शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा गया कि गंगा तट के निकट वीआईपी और अधिकारियों के टेंट लगते हैं जबकि आम श्रद्धालुओं को दूर ऊबड़-खाबड़ भूमि पर टेंट लगाने के साथ पानी और रोशनी का प्रबंध भी स्वयं करना पड़ता है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से आने वाले ग्रामीणों को भी मेला क्षेत्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
संगठन का कहना है कि गढ़-तिगरी मेला कृषि प्रधान देश की आस्था और ग्रामीण संस्कृति का प्रमुख केंद्र है, इसलिए आम श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, रोशनी, सुरक्षित मार्ग और गंगा तक सुगम पहुंच सबसे अहम हैं। हरिद्वार जैसी व्यवस्था विकसित करने और मेले को मिनी कुंभ का स्वरूप देने की घोषणाओं की चर्चा के बीच संगठन ने धरातल पर सुविधाएं बढ़ाने पर बल दिया। गढ़गंगा और तिगरी को जोड़ने वाले प्रस्तावित पीपे के पुल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठी। प्रशासन के अनुसार पुल का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और अनुमति मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई होगी।
दूसरी ओर प्रशासनिक जानकारी के अनुसार मेले का विधिवत शुभारंभ 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर होगा और 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान होगा। तैयारियों के लिए प्रशासन ने 7.20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था, जिसके सापेक्ष शासन ने 5.50 करोड़ रुपये अवमुक्त किए हैं। अस्थायी शौचालय, सफाई, महिला स्नान घाट, चेंजिंग रूम, सीसीटीवी, प्रकाश, पेयजल, पार्किंग और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था प्रस्तावित है। जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने अधिकारियों को टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। किसान संगठन ने कहा कि इन व्यवस्थाओं की सफलता का आकलन आम श्रद्धालुओं को मिली सुविधाओं से ही होना चाहिए।
किसान युवा संसद में गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, विलंबित भुगतान पर ब्याज देने के समर्थन में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से अपील, बारिश से खराब फसलों का मुआवजा तथा सस्ते आलू बीज और खाद की उपलब्धता के मुद्दे भी उठाए गए। संगठन का कहना है कि मेले की प्रतिष्ठा वीआईपी इंतजामों से नहीं, बल्कि आम श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं, सम्मान और सुरक्षित गंगा स्नान से तय होनी चाहिए। इस मौके पर युवा किसानों के अलावा मुख्य रूप से प्रमुख सचिव अरुण सिद्दू उपस्थित रहे।
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