कुरनूल , अप्रैल 14 -- वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री बी राजेंद्रनाथ ने मंगलवार को चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का उपहास करते हुए कहा कि राजधानी अमरावती का निर्माण एक कभी न खत्म होने वाली परियोजना होगी जिसका कोई उपयोग नहीं होगा और यह आने वाली पीढ़ियों पर बोझ बनेगी।
श्री राजेंद्रनाथ ने प्रस्तावित राजधानी शहर माविगुन को एक व्यावहारिक विकल्प बताते हुए कहा कि नायडू सरकार इस परिपक्व सुझाव के लिए वाईएसआरसीपी नेतृत्व पर बेवजह गालियां बरसा रही है।
यहां मीडिया से बात करते हुए पूर्व मंत्री ने दावा किया कि अमरावती भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है और विशेषज्ञों की राय के विपरीत है, जिनका दृढ़ मत है कि कम मिट्टी की भार वहन क्षमता और अन्य कारणों से इस हरे-भरे क्षेत्र में राजधानी का निर्माण संभव नहीं है।
उन्होंने आलोचना करते हुए कहा, "जब पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने के टी रविंद्रन जैसे विशेषज्ञों वाली एक समिति गठित की और शिवरामकृष्णन की रिपोर्ट का समर्थन किया एवं विकेंद्रीकृत विकास का सुझाव दिया तो मुख्यमंत्री नायडू ने इसे नकार दिया था। बाद में वह मंत्री पी नारायण समिति के साथ आगे बढ़े जिसमें उनके अपने व्यापारियों का समूह है और अमरावती परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं जो केवल उनके करीबी लोगों की रियल एस्टेट महत्वाकांक्षाओं को पूरा करती है।"उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रेड्डी ने माविगुन का वैकल्पिक प्रस्ताव रखा था, जो व्यावहारिक एवं किफायती है, जिसके लिए गठबंधन सरकार उन्हें निशाना बना रही है, उनके लिए अपशब्द बोल रही है और अप्रासंगिक मुद्दों को घसीट रही है।
उन्होंने सवाल किया, "अगर अमरावती इतना महत्वपूर्ण है तो तेदेपा और जन सेना पार्टी के कार्यालय उस क्षेत्र में क्यों स्थित नहीं हैं बल्कि श्री रेड्डी द्वारा सुझाए गए क्षेत्र में क्यों हैं?"राजधानी अमरावती के निर्माण में व्याप्त भ्रष्टाचार सबके सामने है, जहां बोलियां 14,800 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से लगाई जा रही हैं जबकि महानगरों में मानक दर 4,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है। इसके अलावा, केवल डिजाइन के लिए ही 400 करोड़ रुपये अग्रिम राशि के रूप में दी जा रही है।
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