कोलकाता , सितंबर 24 -- ममता तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्षी आवाजों को दबाने और एक विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए मतदाता सूची से लगभग 30 लाख मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटाने की साजिश रची गई थी।

सोशल मीडिया पर चुनाव प्रेक्षकों के एक पुराने व्हाट्सएप ग्रुप के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि इन संदेशों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से जवाब मांगते हुए कहा कि देश सब देख रहा है और इस पर जवाब मांगता रहेगा।

श्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का दुरुपयोग करके वैध नागरिकों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से काटे गए। अप्रैल 2026 के इस व्हाट्सएप ग्रुप चैट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें प्रेक्षकों ने खुद आयोग के परस्पर विरोधी निर्देशों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। संवैधानिक संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार करने और पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

श्री बनर्जी के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रवक्ता देबजीत सरकार ने सोशल मीडिया ' पर लोकसभा चुनावों के दौरान के कुछ वीडियो पोस्ट करते हुए श्री बनर्जी के संसदीय क्षेत्र पर सवाल उठाए। श्री सरकार ने लिखा कि यह उनके 'डायमंड हार्बर मॉडल' का सच है, जहां लोकसभा चुनावों के दौरान ईवीएम पर भाजपा उम्मीदवार के बटन पर टेप चिपका दिया गया था ताकि लोग भाजपा को वोट न दे सकें और एक मतदान अधिकारी को खुलेआम टीएमसी के लिए वोट करवाते देखा गया था।

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