नैनीताल , जुलाई 06 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अभियोजन निदेशक के पद पर पुलिस अधिकारी की नियुक्ति के मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि इस पद पर नियुक्ति के लिए क्या नियमावली बनाई गई हैं।

इस मामले को केशर सिंह चौहान की ओर से चुनौती दी गई है तथा मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पूर्व में भी उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा था लेकिन अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस पर राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गयी। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और सरकार को एक माह की मोहलत दे दी।

दायर याचिका में कहा गया कि उत्तराखंड राज्य गठन के लगभग 26 वर्ष बाद भी इस पद पर लगातार पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है जबकि यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 20 के प्रावधानों के विपरीत है।

याचिका के अनुसार, धारा 20 में प्रावधान है कि अभियोजन निदेशक के पद पर सेवानिवृत्त सत्र न्यायाधीश अथवा कम से कम 15 वर्ष का अनुभव रखने वाले अधिवक्ता की नियुक्ति का प्रावधान है। यह भी कहा गया कि पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति करना उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लंघन है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित