लखनऊ , मई 30 -- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की चल रही बैठक का समापन रविवार को होगा। बैठक में शिक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला सुरक्षा, अर्बन माओवाद और वैश्विक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तैयार किए गए चार प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किए जाने की संभावना है।

बैठक में देशभर के विभिन्न प्रांतों से आए कार्यकर्ता-प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए शिक्षा व्यवस्था, अनुसंधान, राष्ट्रीय चुनौतियों तथा वैश्विक परिस्थितियों पर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए। दिनभर चले विचार-विमर्श में विभिन्न प्रस्तावों पर व्यापक चर्चा की गई।

इस अवसर पर अभाविप ने भारतीय उद्योग जगत से अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया। परिषद का मानना है कि युवा शक्ति, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत की साझेदारी भारत को वैश्विक नवाचार और अनुसंधान का केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनुसंधान संबंधी अवसंरचना और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में अनुसंधान एवं विकास पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक प्रतिशत से भी कम व्यय होता है, जिसमें अधिकांश योगदान सरकारी संस्थानों का है।

उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग जगत को शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के साथ दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करना चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा सहित उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने से देश की नवाचार क्षमता को नई गति मिलेगी।

डॉ. सोलंकी ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और ज्ञान सृजन का आधार भी है। अभाविप हमेशा से शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक चिंतन को प्रोत्साहित करने की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत के संसाधनों और शैक्षणिक संस्थानों की बौद्धिक क्षमता का समन्वय आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगा। साथ ही अनुसंधान में बढ़ा हुआ निवेश देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी सुदृढ़ बनाएगा।

अभाविप के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक में पारित होने वाले प्रस्ताव भविष्य की नीतिगत दिशा तय करने और छात्र-युवा समुदाय के समक्ष उपस्थित प्रमुख राष्ट्रीय एवं सामाजिक मुद्दों पर संगठन की दृष्टि स्पष्ट करेंगे।

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