पटना , जुलाई 01 -- िहार सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को नई गति देते हुए चिकित्सकों, नर्सों एवं अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीकरण तथा स्वास्थ्य संस्थानों के लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं पूर्णतः डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।

राज्य सरकार ने बिहार चिकित्सा (संशोधन) अध्यादेश, 2026 तथा बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को 26.06.2026 से लागू कर चिकित्सकों एवं नर्सिंग कर्मियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया है। अब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अथवा किसी अन्य राज्य की राज्य चिकित्सा परिषद में विधिवत पंजीकृत चिकित्सक तथा भारतीय नर्सिंग परिषद अथवा अन्य राज्य की नर्सिंग परिषद में पंजीकृत नर्स बिहार में स्थानीय पंजीकरण अथवा पूर्ववर्ती राज्य से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किए बिना, केवल निर्धारित प्रारूप में स्व-प्रमाणन पोर्टल पर अपलोड कर राज्य में विधिसम्मत रूप से कार्य कर सकेंगे।

राज्य सरकार ने संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के लिए भी बिहार राज्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल परिषद (संशोधन) नियमावली, 2026 अधिसूचित कर दी है। इसके तहत फिजियोथेरेपिस्ट, लैब टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट सहित अन्य संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर भी स्व-प्रमाणन के आधार पर कार्य कर सकेंगे।

इसके लिए एकीकृत डिजिटल हेल्थ लाइसेंसिंग पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित सभी प्रकार के लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन के आवेदन, स्वीकृति तथा निर्गमन की प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होगी। यह पोर्टल निवेशकों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए सिंगल प्वाइंट ऑफ कॉन्टैक्ट के रूप में एनआईसी द्वारा विकसित कराया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि इन सुधारों से बिहार में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा, कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ेगी, स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। यह नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

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