नारायणपुर , अगस्त 01 -- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र के 14 दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों को बरसात के मौसम में आवागमन की बड़ी राहत मिली है। 44वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए कई स्थानों पर अस्थायी लकड़ी के फुट ब्रिज (पैदल पुल) का निर्माण किया है, जो अब ग्रामीणों के लिए लाइफ लाइन साबित हो रहे हैं।

वर्षों तक नक्सली गतिविधियों के प्रभाव के कारण अबूझमाड़ क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास प्रभावित रहा। वर्ष 1990 से क्षेत्र में सक्रिय नक्सली गतिविधियों के चलते कई गांव बरसात के दौरान नदी-नालों के उफान के कारण ओरछा से पूरी तरह कट जाते थे। इससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं, दैनिक जरूरतों और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

क्षेत्र में 44वीं वाहिनी आईटीबीपी के सुरक्षा शिविर स्थापित होने के बाद जवानों ने ग्रामीणों की समस्याओं को समझते हुए अस्थायी लकड़ी के पुलों का निर्माण किया। इन पुलों के माध्यम से अब ग्रामीण बरसात के समय भी पैदल और दोपहिया वाहनों से सुरक्षित रूप से ओरछा तक पहुंच सकेंगे।

44वीं वाहिनी आईटीबीपी के सेनानी सिद्धिक पी. पी. ने कहा कि अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों में बारिश के दौरान नदी-नाले उफान पर आने से ग्रामीणों का संपर्क टूट जाता था। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी की प्राथमिकता केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के जीवन को सुगम बनाना भी है। इसी उद्देश्य से जवानों ने अस्थायी लकड़ी के फुट ब्रिज तैयार किए हैं, जो स्थायी सड़क और पुल निर्माण तक ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा का काम करेंगे।

ग्रामीणों ने आईटीबीपी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि वर्षों बाद उन्हें बरसात के मौसम में भी सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित