भीलवाड़ा , जुलाई 10 -- राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ थाना क्षेत्र में शुक्रवार को अफीम उत्पादक किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर मांडलगढ़ उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया।

अफीम उत्पादक किसानों के संगठन के अध्यक्ष बद्रीलाल तेली के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन में मांडलगढ़ तहसील के करीब सभी अफीम काश्तकारों ने एकजुट होकर शिरकत की। प्रदर्शन के बाद आक्रोशित किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें डोडा-चूरा के निस्तारण और उसके मुआवजे को लेकर आ रही व्यावहारिक दिक्कतों के तुरंत समाधान की पुरजोर मांग की गयी।

ज्ञापन में अफीम उत्पादक किसानों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि भारत सरकार द्वारा जीवन रक्षक दवाइयां बनाने के लिए निर्धारित मापदंडों के अनुसार अफीम की खरीद तो कर ली जाती है, लेकिन उससे बचे डोडा-चूरा को लेकर किसान लंबे समय से मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। वर्ष 2016 से पहले राज्य सरकार द्वारा निर्धारित ठेका पद्धति लागू थी, जिसके तहत 125 प्रति किलो की दर से डोडा चूरा की सरकारी खरीद होती थी। सरकार द्वारा इस व्यवस्था को अचानक बंद किए जाने के बाद से अब डोडा चूरा को विभागीय मौजूदगी में नष्टीकरण करने का कड़ा आदेश लागू है। इस नयी नीति के कारण काश्तकारों को सीधे तौर पर भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अफीम किसानों ने सरकार के सामने अपनी दो टूक मांग रखते हुए कहा कि या तो वजन के अनुसार दो हजार रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से डोडा चूरा का उचित मुआवजा दिया जाए, अन्यथा किसानों को यह कानूनी अधिकार मिले कि वे अपने ही खेत में ट्रैक्टर से हकाई (जुताई) के माध्यम से इसे नष्ट कर सकें।

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