काबुल , मार्च 08 -- अफगानिस्तान में महिलाओं पर सार्वजनिक जीवन में तालिबान की पाबंदियों और मीडिया में लगातार कम होते स्थान के बीच 'रेडियो बेगम' उम्मीद बनकर उभरा है।

संयुक्त राष्ट्र समाचार से बात करते हुए इस स्टेशन की संस्थापक हमीदा अमान ने उन चुनौतियों को साझा किया, जिनका सामना आज अफगान महिलाएं हर कदम पर कर रही हैं। सुश्री हमीदा अमान के अनुसार, महिलाओं के लिए शहर में आवाजाही करना अब एक दुश्वार मसला बन गया है। उन्होंने बताया, "वे बस या टैक्सी से खुद नहीं आतीं, क्योंकि एक महिला, विशेषकर युवती के लिए अकेले घूमना बहुत पेचीदा है।"इन तमाम बंदिशों को पार कर जब महिला पत्रकार स्टूडियो पहुंचती हैं, तब वे अपनी संपादकीय बैठकें करती हैं और लाइव प्रसारण के जरिये मौजूदगी दर्ज कराती हैं।

यूनेस्को के सहयोग से चलने वाला इस स्टेशन को करीब 30 स्त्रियां चलाती हैं। अफगानिस्तान के 34 में से अधिकतर प्रांतों में इसका प्रसारण होता है। हालांकि करीब एक दर्जन प्रांत ऐसे भी हैं, जहां अधिकारियों ने मीडिया में महिलाओं की आवाज तक पर पाबंदी लगा दी है। सुश्री हमीदा अमान कहती हैं, "आज अफगानिस्तान में टीवी या रेडियो बदलो, तो सिर्फ पुरुषों की आवाज़ें या तस्वीरें ही दिखती हैं। इस पुरुष प्रधान माहौल में महिला की आवाज सुनना अंधेरे में रोशनी की एक किरण जैसा है।"मार्च 2021 में शुरू हुए इस स्टेशन ने तालिबान की वापसी के बाद खुद को रातों-रात बदला। संगीत और मनोरंजन कार्यक्रमों में कटौती करनी पड़ी और पूरा ध्यान शिक्षा पर केंद्रित किया गया। जब किशोर लड़कियों के लिए स्कूल बंद हुए तो रेडियो बेगम ने स्कूली पाठ्यक्रम को रेडियो पर लाना शुरू किया। वर्तमान में हर दिन छह घंटे शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित होते हैं। रेडियो बेगम पर शिक्षा के अलावा स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक सहायता और महिला उद्यमिता जैसे विषयों पर भी लाइव कार्यक्रम किये जाते हैं।

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