लखनऊ , मार्च 28 -- उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को अप्रैल माह में एक बार फिर झटका लगने के आसार हैं। ईंधन अधिभार शुल्क (फ्यूल सरचार्ज) में 2.14 प्रतिशत की वृद्धि के चलते प्रदेश के उपभोक्ताओं पर लगभग 142 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि मार्च में ईंधन अधिभार शुल्क में 2.42 प्रतिशत की कमी की गई थी, जिससे उपभोक्ताओं को करीब 141 करोड़ रुपये की राहत मिली थी, हालांकि अब अप्रैल में यह राहत खत्म होती दिख रही है।
उन्होंने बताया कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा जारी आदेश के अनुसार जनवरी 2026 के लिए लागू ईंधन अधिभार शुल्क को अप्रैल 2026 के बिजली बिलों में जोड़ा जाएगा, जिसकी दर 2.14 प्रतिशत तय की गई है। इससे प्रदेश के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उपभोक्ता परिषद ने ईंधन अधिभार वसूली के फार्मूले पर सवाल उठाते हुए विद्युत नियामक आयोग से इसकी जांच कराने की मांग की है। परिषद का कहना है कि फरवरी माह में उपभोक्ताओं से अधिक वसूली और औसत बिलिंग दर के आधार पर की गई वसूली के मामलों को लेकर उसकी लड़ाई जारी है।
वर्मा ने दावा किया कि प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस है। ऐसे में हर महीने ईंधन अधिभार शुल्क की वसूली करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा अपनाया गया फार्मूला उपभोक्ताओं के हित में नहीं है और इसमें पारदर्शिता की कमी है। परिषद ने मांग की है कि इस फार्मूले में बदलाव किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिल सके।
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