चेन्नई , अगस्त 06 -- चेन्नई के अपोलो अस्पताल ने वीवी-एसीएमओ कृत्रिम फेफड़े पर लगातार 119 दिनों तक रखने के बाद 41 वर्षीय महिला के दोनों फेफड़ों का सफल प्रत्यारोपण कर उसे नया जीवन दिया है।
यह भारत में कृत्रिम फेफड़ों के सहारे जिंदा रहने के सबसे सफल मामलों में से एक है। वीवी-ईसीएमओ का इस्तेमाल फेफड़ा प्रत्यारोपण तक पहुंचने के लिए किया गया, जिसमें बिना सर्किट बदले एक ही ऑक्सीजनेटर का इस्तेमाल हुआ। इस मरीज ने गलती से एक हर्बीसाइड निगल लिया था जिसके कारण उसके फेफड़ों को गंभीर नुकसान हुआ था । गौरतलब है कि पैराक्वाट एक बहुत जहरीला हर्बिसाइड है जो तेजी से अंगों को नष्ट कर देता है, जिसमें किडनी और फेफड़े सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उनके फेफड़े इतने खराब हो गए थे कि मैकेनिकल वेंटिलेशन भी काफी नहीं था और उन्हें कृत्रिम परिसंचरण सहायता पर रखना पड़ा।
इसके बाद उन्हें वीवी-ईसीएमओ पर अपोलो अस्पताल की हृदय और फेफड़ा प्रत्यारोपण सेवा में एयरलिफ्ट किया गया। गहन चिकित्सा प्रबंधन से उनकी किडनी तो ठीक हो गई लेकिन उनके फेफड़े बुरी तरह खराब हो चुके थे, इसलिए दोनों फेफड़ों का प्रत्यारोपण ही उनके बचने का एकमात्र रास्ता था। लगभग चार महीने तक ईसीएमओ पर रहने के दौरान टीम ने कई मेडिकल चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया, जिनमें अस्थायी रूप से किडनी के खराब होने, रक्त संक्रमण, दबाव के कारण होने वाला घाव और लंबे समय तक पुनर्वास शामिल थे।
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