पटना , जनवरी 26 -- बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृम मंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को निर्देश दिया है कि बिहार पुलिस अपराधियों के खिलाफ और अधिक सख्ती से कार्रवाई करे।

श्री चौधरी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर बिहार पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन परिसर झंडोत्तोलन के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि बिहार पुलिस को कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राज्य के विकास में भी अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि बिहार पुलिस अपराधियों के खिलाफ और अधिक सख्ती से कार्रवाई करे। सुशासन को मजबूती से स्थापित करे और न्याय दिलाने की प्रक्रिया को त्वरित गति से आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि बिजली, सड़क और पानी को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम सरकार ने किया है और अब उद्योगों का जाल बिछाया जा रहा है, इसमें पुलिस की भूमिका अहम है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों का जाल बिछाने में पुलिस की भूमिका निर्णायक है। क्योंकि कानून व्यवस्था जितनी मजबूत होगी, उतना ही अधिक उद्योगपति बिहार में निवेश करना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार के तेज विकास के लिए राजस्व बढ़ाना जरूरी है और राजस्व तभी बढ़ेगा जब राज्य में उद्योगों का विस्तार होगा।

श्री चौधरी ने कहा कि न्याय के साथ सुशासन और न्याय के साथ विकास की नीति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लगातार आगे बढ़ रही है। इसे और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें स्वतंत्रता सेनानियों के कठिन संघर्ष के कारण आजादी मिली और आज हम 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत आगे बढ़ रहा है, बिहार आगे बढ़ रहा है और देश के निर्माण में हर वर्ग की भूमिका है। इसमें पुलिस सेवा और भारतीय सेना का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना पूरी दुनिया में भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का काम कर रही है, वहीं बिहार पुलिस अपराध नियंत्रण और सुशासन को और मजबूती से स्थापित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने भारतीय सेना और बिहार पुलिस को गणतंत्र दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि 14 करोड़ बिहारवासियों को न्याय के साथ सुशासन, न्याय के साथ विकास और जनता को आत्मनिर्भर बनाने की पूरी योजना मुख्यमंत्री श्री कुमार के नेतृत्व में चल रही है। वर्ष 2005 से 2025 तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने न्याय के साथ विकास की कल्पना को जमीन पर उतारा है। अब इस सोच को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा देखे गए भारत के स्वर्णिम काल के सपने को साकार किया जा सके।

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