रांची , सितंबर 10 -- झारखंड में हाल ही में हुए लोजपा विधायक के पुत्र के अपहरण मामले में झारखंड पुलिस की त्वरित कार्रवाई, सघन चेकिंग और कड़ी नाकेबंदी के बाद अपहृत युवक सकुशल बरामद कर लिया गया।
लेकिन इस पूरे मामलेमें जो सच्चाई जांच के दौरान सामने आई है, उसने भारतीय जनता पार्टी के चाल, चेहरा और चरित्र को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। एमिटी यूनिवर्सिटी गेट के पास से हुए इस घृणास्पद अपहरणकांड में मुख्य साजिशकर्ता कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि भाजपा का अपर बाजार मंडल अध्यक्ष रौनक राजपूत सिंह ही निकला है।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता अख्तर अली ने आज एक बयान जारी कर कहा कि घटना के तुरंत बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने पूरी हड़बड़ी में पुलिस-प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन करने की धमकी दी थी। वे बिना तथ्यों को जाने राज्य सरकार और कानून-व्यवस्था की छवि को धूमिल करने में जुट गए थे। लेकिन जैसे ही पुलिस की निष्पक्ष और त्वरित जांच में भाजपा के मंडल अध्यक्ष की सीधी संलिप्तता का पर्दाफाश हुआ, पूरी भाजपा बैकफुट पर आ गई है और अब अपने ही नेता को पहचानने से भाग रही है।
इनका क्रोनोलॉजी समझिए अपराध भाजपा नेताओं का, दोष सरकार पर श्री अली ने राज्य में हुई पूर्व की कई गंभीर आपराधिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है, जहां अपराध के पीछे भाजपा के लोगों का हाथ रहा हो, कांके में अनिल टाइगर हत्याकांड रांची के कांके में हुई चर्चित अनिल टाइगर हत्याकांड मे मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड के रूप में भाजपा से जुड़े दबंग नेता और भू-माफिया देवव्रत नाथ शाहदेव का नाम सामने आना, विशुनपुर में अंधविश्वास और नरबलि में मासूम बच्चे की निर्मम हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। इसमें भी भाजपा के स्थानीय रसूखदार नेताओं की भूमिका उजागर हुई।
जमशेदपुर हत्याकांड और गुंडागर्दी में भी भाजपा के कई युवा मोर्चा और मंडल स्तर के नेताओं की सीधी संलिप्तता और अपराधियों को संरक्षण देने की बातें जांच में साबित हो चुकी हैं।
इसी तरह खूंटी जिले में पाहन और स्थानीय लोगों की हत्या तथा वंदना-हिंसा के मामलों में भी भाजपा के समर्थित और संरक्षित असामाजिक तत्वों का हाथ पाया गया था।
इन सभी घटनाओं में एक बात पूरी तरह समान रही है,घटना होते ही भाजपा का बेबुनियाद हल्ला-बोल, सरकार पर अनर्गल आरोप, और जैसे ही जांच में अपने ही नेता/कार्यकर्ता पकड़े जाएं, तो चुप्पी साध लेना और उनसे पल्ला झाड़ लेना।
श्री अली ने सवाल उठाया की क्या यह सरकार को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश तो नहीं क्या भारतीय जनता पार्टी झारखंड में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए जानबूझकर अपने आपराधिक मानसिकता वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं को ऐसी वारदातों में लगा रही है?झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और गृह विभाग से मांग करती है कि जांच का नया दायरा तय हो राज्य में होने वाली किसी भी बड़ी आपराधिक घटना, अपहरण या सुनियोजित हिंसा के बाद पुलिस-प्रशासन अपनी जांच के दायरे में भाजपा से जुड़े आपराधिक इतिहास वाले नेताओं, मंडल अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों को प्राथमिकता से शामिल करे।
श्री अली ने अंत में कहा कि झारखंड की जनता बेहद जागरूक है।भाजपा की इस अपराध करो, हल्ला मचाओ और पकड़े जाने पर भाग जाओ की दोहरी और षड्यंत्रकारी राजनीति को जनता पूरी तरह समझ चुकी है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन किसी भी अपराधी को बख्शने वाला नहीं है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल का चोला क्यों न ओढ़े हो।
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