चेन्नई , अक्टूबर 22 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने अपना भगवा चोला उतारकर तमिल समर्थक राजनीतिक क्षेत्र में कदम जमाने का प्रयास शुरू कर दिया है।

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का पुरजोर बचाव करते हुए और दिल्ली पुलिस की खिंचाई करते हुए श्री अन्नामलाई ने अपना गुस्सा भाजपा और केंद्र की मोदी सरकार पर निकाला। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "केंद्र सरकार यह भूल जाती है कि वह दिल्ली में 12 साल से अधिक समय से सत्ता में है और खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए हर समय एक दुश्मन पैदा करती है। अफसोस की बात है कि यह एक तरस योग्य बात है!"इसके साथ ही उन्होंने सीजेपी के प्रदर्शन को देशविरोधी और विदेशी फंडिंग से संचालित बताने के आरोपों को भी खारिज कर दिया।

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अपनी पोस्ट में लिखा, "इस राष्ट्रविरोधी वाली बात को अब बंद करें। एफसीआरए गृह मंत्रालय के तहत आता है। देश की सभी एजेंसियां विपक्ष को रिपोर्ट नहीं करती हैं। विदेशों में स्थित सभी भारतीय दूतावासों में पर्याप्त कर्मचारी हैं जो विदेशी दुश्मनों से सांठगांठ करने वाले किसी भी भारतीय पर नजर रख सकते हैं। ईमानदारी से कहें तो हर विरोध प्रदर्शन और बयान को देशविरोधी या बाहरी ताकतों द्वारा वित्तपोषित बताना अब बहुत थकाऊ और उबाऊ हो चुका है।"उन्होंने 2011 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने की घटना को याद दिलाया, जब श्री मोदी ने कहा था कि यदि उनके हाथ न बंधे होते तो वह केंद्र सरकार के खिलाफ जंग छेड़ देते।

सीजेपी नेताओं की झेली गयी मुश्किलों का हवाला देते हुए श्री अन्नामलाई ने कहा, "आज आपको अनिश्चित काल के लिए जेल में डाला जा सकता है, आपके मुचलके खारिज किये जा सकते हैं, और आश्चर्यजनक रूप से एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट आपके आसपास चक्कर लगायेगा, जबकि उसे केवल निवारक बांड मामलों से निपटने का अधिकार प्राप्त है। यदि आप लोकतंत्र में कानून की उचित प्रक्रिया के उल्लंघन पर सवाल उठाते हैं, तो आपको गलत नाम दिये जायेंगे और आप पर हमलों की झड़ी लगा दी जायेगी, जिसमें आपको 'फॉरेन एजेंट' तक करार दे दिया जायेगा।"श्री अन्नामलाई ने केंद्र सरकार से कुतर्क न करने और सीधे जवाब देने की मांग करते हुए पांच कड़े सवाल पूछे। इनमें जंतर-मंतर को विरोध स्थल के रूप में वि-अधिसूचित करने, सहायक पुलिस आयुक्त को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में सशक्त बनाने की प्रणाली और एंटी-नीट विरोध प्रदर्शन में पेलेट गन के इस्तेमाल पर की गई कार्रवाई से जुड़े सवाल शामिल थे।

यह सवाल उठाते हुए कि क्या बैरिकेड्स फांदने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं से भी इसी तरह का व्यवहार किया गया था, उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से नहीं।"कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई के राजनीतिक गुरु बी.एल. संतोष रहे हैं। वही उनको द्रविड़ राजनीति की मुख्यधारा में लाये थे। पर अब तमिलनाडु की पहचान की राजनीति को अपनाने के लिए अपने भगवा अतीत को मिटा रहे हैं। उन्होंने अपनी मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए भाजपा को हमेशा के लिए छोड़ दिया और अपना राजनीतिक संगठन 'वी द लीडर्स' शुरू किया।

जहाँ एक ओर उनके भगवा समर्थक इस बदलाव से हैरान हैं, वहीं दूसरी ओर सीजेपी के प्रति अन्नामलाई का यह समर्थन भाजपा के 'धुरंधर' के रूप में उनकी छवि को ध्वस्त करने और राजनीतिक लाभ हासिल करने की रणनीति माना जा रहा है।

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