नयी दिल्ली , अगस्त 28 -- कांग्रेस ने कहा है कि सरकार का शिक्षा क्षेत्र काे उपेक्षित करने का आलम यह है कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को तीन वर्षों में 10500 विद्यार्थियों को मुफ्त कोचिंग के लिए नामांकित करना था, लेकिन वह अब तक मात्र 2790 विद्यार्थियों का ही नामांकन कर पायी है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि मंत्रालय निर्धारित लक्ष्य का मात्र 26 प्रतिशत ही पूरा कर पाया है। इसी खुलासे के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बढ़ते जनदबाव से बचने की कोशिश में 15 अगस्त को विद्यार्थियों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार की मुफ्त कोचिंग योजना का प्रदर्शन लोगों में भरोसा पैदा नहीं कर रहा है।
श्री रमेश ने कहा, "इस योजना का बजट हर वर्ष कम हुआ है और पिछले वर्ष इस पर किया गया खर्च निर्धारित बजट के आधे से भी कम था। ये तथ्य सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति की नवीनतम रिपोर्ट में सामने आये हैं, जिसे 10 अगस्त 2026 को संसद में पेश किया गया। "कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश की चरमराई शिक्षा व्यवस्था को बुनियादी तौर पर ठीक करने और सार्वजनिक शिक्षा में दोबारा निवेश करने की बजाय मोदी सरकार ने सार्वजनिक संसाधनों को ऑनलाइन कोचिंग में लगाने का फैसला किया है। उन्होंने इसे जवाबदेही से बचने का एक उपक्रम मात्र करार दिया और कहा कि सरकार पहले ही दिखा चुकी है कि इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने की उसकी क्षमता बेहद कम है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पहले ही देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाते हुए 17 जून को कोटा में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में कहा था कि मुनाफा कमाने वाली कोचिंग इंडस्ट्री ने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की जगह ले ली है और भारतीय परिवार कोचिंग केंद्रों पर सरकार द्वारा शिक्षा में किये जाने वाले निवेश से 2.5 गुना अधिक खर्च कर रहे हैं।
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